PNG कनेक्शन का लक्ष्य चूका! 6 महीने में सिर्फ 13.4 लाख नए कनेक्शन, जानें क्या है वजह

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
PNG कनेक्शन का लक्ष्य चूका! 6 महीने में सिर्फ 13.4 लाख नए कनेक्शन, जानें क्या है वजह

भारत में पाइप नेचुरल गैस (PNG) के विस्तार की रफ्तार धीमी है। पिछले 6 महीनों में लक्ष्य से काफी कम, केवल 13.4 लाख नए कनेक्शन ही जुड़े हैं। भारी सिक्योरिटी डिपॉजिट और LPG की तरफ ग्राहकों का झुकाव इस बदलाव में रुकावट बन रहे हैं।

PNG विस्तार में धीमी रफ्तार

भारत में पाइप नेचुरल गैस (PNG) को बढ़ावा देने की कोशिशें उम्मीद से कहीं ज्यादा धीमी साबित हो रही हैं। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले छह महीनों में केवल 13.4 लाख नए कनेक्शन ही चालू हो पाए हैं, जो कि मार्च 2026 तक 60 लाख कनेक्शन के सरकारी लक्ष्य का महज़ 20% है। सिटी गैस डिस्ट्रिब्यूटर्स ने 1.7 करोड़ से ज़्यादा घरों को गैस पहुंचाने का नेटवर्क तो तैयार कर लिया है, लेकिन असली चुनौती असल ग्राहकों को जोड़ने की है।

ग्राहकों के लिए क्या हैं मुश्किलें?

कई व्यावहारिक दिक्कतें लोगों को PNG अपनाने से रोक रही हैं। सबसे बड़ी रुकावट है शुरुआती लागत, जिसमें ₹6,000 का सिक्योरिटी डिपॉजिट शामिल है, जो कई परिवारों को महंगा लग रहा है। इसके अलावा, बिजली या पानी जैसी ज़रूरी सेवाओं के विपरीत, PNG का विकल्प चुनना वैकल्पिक है। कई ग्राहक, खासकर किराए के घरों में रहने वाले या जिनके पास पहले से ही एलपीजी (LPG) सिलेंडर हैं, अपनी मौजूदा सुविधा को ही पसंद कर रहे हैं। मकान मालिक भी अपने घरों में पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर लगाने में खास दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं।

कंपनियों पर लागत का दबाव

गैस वितरण कंपनियों के लिए ऑपरेटिंग कॉस्ट (Operating Cost) भी एक बड़ी चुनौती है। इन कंपनियों को पाइपलाइन बिछाने में भारी कैपिटल स्पेंडिंग (Capital Spending) करनी पड़ती है। साथ ही, खुदाई और इंफ्रास्ट्रक्चर के काम के लिए स्थानीय नगर निगमों द्वारा लगाए जाने वाले शुल्क से लागत और बढ़ जाती है। जब ये खर्च ज़्यादा होते हैं, तो कंपनियों के लिए कनेक्शन फीस को किफायती रखना और मुनाफे को बनाए रखना मुश्किल हो जाता है।

सुधार के संकेत और आगे की राह

हालांकि, कनेक्शन लगाने की रफ्तार में कुछ सुधार के संकेत मिले हैं। 2025 के आखिर में रोज़ाना करीब 3,000 कनेक्शन की तुलना में अब यह आंकड़ा 9,000 प्रतिदिन से ज़्यादा हो गया है। यह प्रगति सरकारी निर्देशों के बाद हुई है, जिसमें नगर निगमों को इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज कम करने को कहा गया है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (Oil Marketing Companies) ने भी PNG-रेडी इलाकों में ग्राहकों को LPG से दूर करने की कोशिशें तेज की हैं। फिलहाल, एक डी-डुप्लीकेशन (De-duplication) एक्सरसाइज चल रही है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि कौन से घर LPG और PNG दोनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे भविष्य में ग्राहकों को PNG पर लाने के लिए ज़्यादा सटीक कदम उठाए जा सकेंगे।

सरकार का 2032 तक 12.6 करोड़ कनेक्शन तक पहुंचने का दीर्घकालिक लक्ष्य वर्तमान पहुंच से काफी आगे है। भले ही इस सेक्टर ने 312 भौगोलिक क्षेत्रों में 1.7 करोड़ से ज़्यादा कनेक्शन का आधार तैयार कर लिया हो, लेकिन क्षमता और असल इस्तेमाल के बीच एक बड़ा अंतर है। निवेशकों के लिए मुख्य बात यह होगी कि सिटी गैस कंपनियां नेटवर्क विस्तार की ऊंची लागत और ग्राहकों को तेजी से जोड़ने की जरूरत के बीच कैसे संतुलन बनाती हैं ताकि वे दीर्घकालिक लक्ष्यों को पूरा कर सकें।

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