India Oil Firms: ₹14-18 लीटर घाटे में बेच रहे पेट्रोल-डीजल! कच्चा तेल पहुंचा आसमान पर

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AuthorAditya Rao|Published at:
India Oil Firms: ₹14-18 लीटर घाटे में बेच रहे पेट्रोल-डीजल! कच्चा तेल पहुंचा आसमान पर
Overview

भारत की ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) इन दिनों भारी नुकसान झेल रही हैं। वे पेट्रोल **₹14** प्रति लीटर और डीजल **₹18** प्रति लीटर लागत से भी कम दाम पर बेच रही हैं। पश्चिम एशिया के संकट के कारण कच्चा तेल (Crude Oil) के दाम आसमान छू रहे हैं, जो इस स्थिति का मुख्य कारण है।

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मार्जिन पर भारी दबाव और घाटा

देश में पेट्रोल और डीजल के रिटेल दाम लंबे समय से स्थिर हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कच्चा तेल (Crude Oil) $120-125 प्रति बैरल के पार जाने से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को बड़ा झटका लगा है। इससे उनकी मार्केटिंग मार्जिन (marketing margins) पर भारी दबाव आ गया है।

Icra की रिपोर्ट के अनुसार, इन कच्चे तेल की कीमतों पर पेट्रोल पर ₹14 प्रति लीटर और डीजल पर ₹18 प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। यह नुकसान सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक ही सीमित नहीं है। अगर मौजूदा रुझान जारी रहा, तो फाइनेंशियल ईयर 2027 तक कुकिंग गैस (LPG) पर कंपनियों को ₹80,000 करोड़ का अंडर-रिकवरी (under-recoveries) झेलना पड़ सकता है। वहीं, फर्टिलाइजर (fertiliser) सब्सिडी का बोझ भी बढ़कर ₹2.05-2.25 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है, जो बजटेड ₹1.71 लाख करोड़ से काफी ज्यादा है।

सेक्टर पर नकारात्मक असर

बढ़ती लागत का असर कई डाउनस्ट्रीम इंडस्ट्रीज़ (downstream industries) पर भी पड़ रहा है। Icra ने फ्यूल रिटेलिंग, फर्टिलाइजर, बेसिक केमिकल्स और पेट्रोकेमिकल (petrochemical) सेक्टर के लिए अपना आउटलुक (outlook) नकारात्मक कर दिया है। खासकर फर्टिलाइजर सेक्टर में सल्फर, अमोनिया और नेचुरल गैस (natural gas) के दाम बढ़ने से लागत में भारी इजाफा हुआ है। वेस्ट एशिया संकट से पहले ही यूरिया के पूल प्राइस (urea pool prices) $13 प्रति MMBTU से बढ़कर $19/MMBTU हो गए थे।

सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स (City gas distributors) भी दबाव महसूस कर रहे हैं। हालांकि, घरों में सप्लाई होने वाली पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के मार्जिन पर ज्यादा असर नहीं है, लेकिन कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) के मार्जिन में कमी आने की आशंका है, क्योंकि लागत वृद्धि का पूरा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जा रहा है।

जियोपॉलिटिकल रिस्क और सप्लाई चेन की मुश्किलें

होरमुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण व्यापार मार्गों में सप्लाई बाधित होने से ईंधन की उपलब्धता पर असर पड़ रहा है। यह वैश्विक तेल और LNG व्यापार का करीब 20% हिस्सा संभालता है। इससे डाउनस्ट्रीम इंडस्ट्रीज़ पर कीमतों का दबाव और बढ़ गया है। Icra का कहना है कि अगर मार्जिन का दबाव जारी रहा, तो इन सेगमेंट्स की कंपनियों के क्रेडिट प्रोफाइल (credit profiles) कमजोर हो सकते हैं। राहत की उम्मीद जियोपॉलिटिकल टेंशन (geopolitical tensions) के कम होने और ग्लोबल सप्लाई चेन (supply chains) के सामान्य होने पर निर्भर करती है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.