Ministry of Power ने नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 का ड्राफ्ट कैबिनेट को सौंपा है। 2005 के बाद यह पहला बड़ा बदलाव है, जो ग्रिड स्टेबिलिटी, रिन्यूएबल एनर्जी और स्मार्ट मीटर मैन्युफैक्चरिंग पर केंद्रित है।
20 साल बाद बड़ा बदलाव
पावर मिनिस्ट्री ने नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 का ड्राफ्ट यूनियन कैबिनेट को भेज दिया है। यह कदम इसलिए खास है क्योंकि 2005 के बाद पहली बार इस पॉलिसी में बड़ा ओवरहॉल देखने को मिल रहा है। पुरानी पॉलिसी का मकसद बिजली की पहुंच सुनिश्चित करना था, लेकिन 2026 का अपडेट आज के हाई-कैपेसिटी और आधुनिक ग्रिड की जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाया गया है।
पावर सेक्टर में निवेश के मौके
पॉलिसी में ग्रिड कैपेसिटी का 60% यूटिलाइजेशन टारगेट रखा गया है। जानकारों का मानना है कि रिन्यूएबल एनर्जी के बढ़ते शेयर के साथ ग्रिड को स्टेबल रखना एक चुनौती है, जिसके चलते Power Grid Corporation of India जैसी कंपनियों को आने वाले समय में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और कैपिटल स्पेंडिंग की जरूरत होगी।
लोकल मैन्युफैक्चरिंग पर जोर
सरकार का खास फोकस अब 'आत्मनिर्भर भारत' के तहत स्मार्ट मीटर बनाने पर है। मिनिस्ट्री लोकल डेवलपर्स को चिप डिजाइन और प्रोडक्शन के लिए इंसेटिव दे रही है। इससे Genus Power Infrastructures और HPL Electric & Power जैसी कंपनियों को सीधा फायदा मिल सकता है, क्योंकि वे लोकल सप्लाई चेन का हिस्सा बन रही हैं।
कोयले की अहमियत बरकरार
भले ही रिन्यूएबल एनर्जी पर जोर दिया जा रहा हो, लेकिन कोयले की भूमिका कम नहीं होने वाली। सितंबर में बिजली की डिमांड 14% बढ़ी है, जिसे पूरा करने के लिए कोल-बेस्ड पावर का सहारा लेना मजबूरी है। NTPC और Coal India जैसी कंपनियां एनर्जी ट्रांजिशन के इस दौर में भी देश की बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए सेंटर स्टेज पर बनी रहेंगी। फिलहाल, रोजाना 440 से ज्यादा रेल रैक की मदद से पावर प्लांट्स तक कोयला पहुंचाया जा रहा है ताकि सप्लाई में कोई कमी न आए।
