LPG की कीमत में बड़ा उछाल! ₹60 महंगा हुआ सिलेंडर, आम आदमी की जेब पर असर, OMCs को मिली राहत
Overview
West Asia में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत में घरेलू LPG की कीमतों में ₹60 प्रति सिलेंडर का इजाफा हुआ है। इस बढ़त के बाद दिल्ली में LPG सिलेंडर की कीमत ₹913 हो गई है। सरकार का ये कदम सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को भारी नुकसान से बचाने के लिए उठाया गया है, जो अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी से जूझ रही हैं। हालांकि, इस बढ़ोतरी के बावजूद, घरेलू LPG की कीमतें अभी भी बाज़ार भाव से काफी कम हैं।
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West Asia टेंशन का असर, LPG सिलेंडर ₹60 महंगा, OMCs को राहत, ग्राहकों पर बोझ
West Asia में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में बढ़ती कीमतों का सीधा असर अब भारतीय घरेलू LPG (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) की कीमतों पर दिखने लगा है। सरकार ने राज्य-संचालित ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को हो रहे भारी नुकसान से बचाने के लिए LPG सिलेंडर के दाम में ₹60 का इजाफा किया है। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में LPG सिलेंडर की कीमत अब ₹913 हो गई है।
OMCs की वित्तीय सेहत पर दबाव और सरकारी राहत:
पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय LPG की कीमतों में उछाल के कारण OMCs, जैसे इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम, भारी अंडर-रिकवरी (नुकसान) झेल रही थीं। इस फाइनेंशियल ईयर की पहली तीन तिमाहियों में ही कंपनियों को लगभग ₹20,000 करोड़ का नुकसान हुआ। पिछले फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में यह नुकसान ₹40,000 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान था, जिसमें से ₹30,000 करोड़ की भरपाई सरकार से मिलनी थी। इससे पहले, 2022-23 में भी सरकार ने ₹22,000 करोड़ की सहायता प्रदान की थी।
ग्राहकों पर मामूली असर, पर तुलनात्मक रूप से सस्ता:
इस ₹60 की बढ़ोतरी से आम उपभोक्ता पर रोज़ाना सिर्फ़ 20 पैसे प्रति व्यक्ति (चार लोगों के परिवार के हिसाब से) का ही अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। अच्छी बात यह है कि घरेलू LPG अभी भी बाज़ार भाव से काफी कम पर मिल रही है। पड़ोसी देशों जैसे पाकिस्तान (लगभग $12.50), श्रीलंका (लगभग $16.70), और नेपाल (लगभग $15.00) की तुलना में भारतीय LPG की कीमतें अभी भी काफी किफायती हैं।
पेट्रोल-डीज़ल स्थिर, पर OMCs के लिए LPG बनी सिरदर्द:
जहां LPG की कीमतों में यह वृद्धि हुई है, वहीं पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें पिछले काफी समय से स्थिर हैं। अप्रैल 2022 से इन ईंधनों की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, क्योंकि OMCs इन उत्पादों पर फिलहाल अच्छा मार्जिन कमा रही हैं। हालांकि, LPG के लगातार अंडर-रिकवरी की मार इन कंपनियों की समग्र वित्तीय स्थिरता पर पड़ रही है।
ऊर्जा आयात पर निर्भरता और भू-राजनीतिक जोखिम:
भारत अपनी LPG की ज़रूरत का 50% से ज़्यादा और कच्चे तेल की 88% से ज़्यादा मात्रा आयात करता है। ऐसे में, West Asia में भू-राजनीतिक तनाव, विशेष रूप से होरमुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का रास्ता, जो भारत के 80% से ज़्यादा LPG आयात का मार्ग है, ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ा जोखिम पैदा करता है।
अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में, सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (Saudi Contract Price) हाल ही में $466 प्रति टन से बढ़कर $542 से ऊपर पहुँच गया है। इसी तरह, ब्रेंट क्रूड (Brent crude) की कीमत भी फरवरी के अंत से 27% उछलकर $92.69 प्रति बैरल को पार कर गई है।
सरकार के कदम और भविष्य की रणनीति:
इन वैश्विक जोखिमों से निपटने के लिए, सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) का सहारा लिया है ताकि घरेलू LPG उत्पादन को बढ़ाया जा सके। इसके साथ ही, रूस और अमेरिका जैसे देशों से LPG की खरीद के विकल्प भी तलाशे जा रहे हैं।
वर्तमान में, भारत के पास लगभग 6 से 8 हफ्तों का क्रूड ऑयल और ईंधन भंडार मौजूद है। विश्लेषकों का मानना है कि पेट्रोल-डीज़ल की स्थिर कीमतें OMCs को कुछ राहत दे सकती हैं, लेकिन LPG की अंडर-रिकवरी की समस्या एक बड़ा सिरदर्द बनी हुई है। ब्रोकरेज फर्मों ने भी इस अनिश्चितता को देखते हुए ज़्यादातर 'होल्ड' रेटिंग दी है, और उनके टारगेट प्राइस मौजूदा स्थिति को दर्शाते हैं।