एनर्जी बाज़ार की अनोखी तस्वीर
भारत का एनर्जी बाज़ार इस समय एक बिलकुल अलग रंग दिखा रहा है। एक तरफ जहां लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) की खपत लगातार घट रही है, वहीं दूसरी तरफ डीज़ल और पेट्रोल की मांग अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है।
LPG पर संकट, इम्पोर्ट्स गिरे
मार्च 2026 में LPG की खपत में महीने-दर-महीने 16% और साल-दर-साल 13% की ज़बरदस्त गिरावट देखी गई, जो घटकर 2.38 मिलियन टन रह गई। इस कमी की सीधी वजह वेस्ट एशिया (West Asia) में चल रहे संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) जैसे अहम सप्लाई रूट पर पड़ने वाले असर से इम्पोर्ट्स का ठप्प होना है। भारत अपनी LPG का 90% इसी रूट से इम्पोर्ट करता है। पिछले महीने, फरवरी में जहां इम्पोर्ट लगभग 2 मिलियन टन था, वहीं मार्च में यह घटकर केवल 1.1 मिलियन टन रह गया।
डीज़ल-पेट्रोल की डिमांड में रिकॉर्ड उछाल
जहां LPG की डिमांड गिर रही है, वहीं ट्रांसपोर्ट फ्यूल्स की मांग आसमान छू रही है। डीज़ल की खपत रिकॉर्ड 8.73 मिलियन टन और पेट्रोल की मांग 3.78 मिलियन टन तक पहुंच गई। इस बंपर डिमांड का मुख्य कारण उपभोक्ताओं के बीच यह डर है कि सप्लाई चेन में आगे और भी दिक्कतें आ सकती हैं, जिससे इन ज़रूरी ईंधनों की कमी न हो जाए।
इम्पोर्ट पर भारी निर्भरता और ग्लोबल असर
दुनिया के तीसरे सबसे बड़े एनर्जी कंज्यूमर भारत की इम्पोर्ट पर निर्भरता काफी ज़्यादा है। देश अपनी ज़रूरत का लगभग 60% LPG इम्पोर्ट करता है। इसके अलावा, भारत के कच्चे तेल (crude oil) का 54% से अधिक हिस्सा और गैस व LPG का एक बड़ा हिस्सा वेस्ट एशिया से आता है। इस अस्थिरता के कारण ब्रेंट क्रूड (Brent crude) जैसे कच्चे तेल की कीमतें $120 प्रति बैरल के पार जा रही हैं। मार्केट का ध्यान अब सप्लाई की उपलब्धता पर केंद्रित हो गया है, और छोटे-मोटे संकट भी कीमतों को बढ़ा रहे हैं।
बड़े जोखिम और सरकार का कदम
इम्पोर्टेड फ्यूल्स पर इतनी निर्भरता भारत के लिए बड़े जोखिम पैदा करती है। यह महंगाई (Inflation) बढ़ा सकती है और ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) को भी चौड़ा कर सकती है, जिसका अनुमान मार्च 2026 में $4 बिलियन से ज़्यादा है। पैनिक बाइंग (panic buying) के चलते बढ़ी ट्रांसपोर्ट फ्यूल की मांग, अगर स्थिति और बिगड़ी तो अंदरूनी आर्थिक कमजोरी को छुपा सकती है। इस स्थिति से निपटने के लिए, सरकार पाइप्ड नेचुरल गैस (Piped Natural Gas - PNG) के ज़रिए डोमेस्टिक सप्लाई को तेज़ी से बढ़ाने पर ज़ोर दे रही है। अप्रैल के अंत तक 50 लाख नए PNG कनेक्शन देने और इंफ्रास्ट्रक्चर अप्रूवल्स (infrastructure approvals) को आसान बनाने की योजना है।
सेक्टर का वैल्यूएशन और फ्यूचर
सेक्टर का ओवरऑल प्राइस-टू-अर्निंग्स (Price-to-Earnings - P/E) रेश्यो करीब 15.2 है, लेकिन कुछ एनर्जी कंपनियों को निगेटिव अर्निंग्स ग्रोथ (negative earnings growth) का सामना करना पड़ रहा है। PNG के विस्तार में इंफ्रास्ट्रक्चर और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी की चुनौतियाँ होंगी। ब्रोकरेज हाउसेस (Brokerage Houses) की राय मिली-जुली है, कुछ टाटा पावर (Tata Power) जैसी कंपनियों पर 'Buy' रेटिंग दे रहे हैं, वहीं कुछ एनर्जी कंपनियों को दबाव में देख रहे हैं।
शॉर्ट-टर्म Outlook और लॉन्ग-टर्म रणनीति
फिलहाल, मार्केट का Outlook वेस्ट एशिया के जियो-पॉलिटिकल तनावों (geopolitical tensions) और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगा। हालांकि, लंबी अवधि में, भारत का फोकस डोमेस्टिक एनर्जी सोर्सेज और 2030 तक रिन्यूएबल एनर्जी (renewable energy) के लक्ष्यों को पूरा करने पर है, जो देश की एनर्जी सिक्योरिटी (energy security) को मज़बूत करेगा।