भारत में एलपीजी (LPG) घरेलू उपभोक्ताओं की संख्या में अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच **62 लाख** की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। यह पिछले एक दशक में पहली बार है जब एलपीजी ग्राहकों का बेस घटा है।
गिरावट की मुख्य वजहें
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, सक्रिय एलपीजी कनेक्शन की संख्या अप्रैल 2026 के 33.9 करोड़ से घटकर सितंबर 2026 तक 32.7 करोड़ रह गई है। यह लगभग 1% की गिरावट है। मिडिल ईस्ट में चल रहे जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण भारत के आयात पर असर पड़ा है, जिससे तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने नई कनेक्शन जारी करने की रफ्तार धीमी कर दी है। इसके साथ ही, आधार-आधारित बायोमेट्रिक ऑडिट के जरिए डुप्लीकेट और निष्क्रिय खातों को भी हटाया जा रहा है।
PNG की ओर बढ़ रहा है झुकाव
यह गिरावट सिर्फ सप्लाई की कमी नहीं, बल्कि सरकार की एक सोची-समझी नीति का भी हिस्सा है। शहरों में परिवारों को अब पारंपरिक एलपीजी सिलेंडर से पाइप नेचुरल गैस (PNG) पर शिफ्ट किया जा रहा है। अप्रैल से जुलाई के बीच सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनियों ने करीब 6 लाख नए PNG कनेक्शन जोड़े हैं।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
- OMCs पर असर: Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum जैसी कंपनियों के लिए यह समय सप्लाई मैनेजमेंट और दक्षता सुधारने का है। हालांकि, नए ग्राहकों के जुड़ने की रफ्तार कम होने से शॉर्ट-टर्म ग्रोथ मोमेंटम पर असर पड़ सकता है।
- CGD सेक्टर के लिए अवसर: PNG की बढ़ती पहुंच से सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों की ग्रोथ स्टोरी मजबूत हो रही है।
दक्षिणी भारत में सबसे ज्यादा 26.3 लाख कनेक्शन कम हुए हैं, जबकि उत्तरी भारत 9.93 करोड़ कनेक्शन के साथ अब भी सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है। अब निवेशकों की नजरें मिडिल ईस्ट से आने वाली सप्लाई और शहरों में PNG इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार की गति पर टिकी हैं।
