भारत की LNG आयात पर निर्भरता जुलाई 2026 तक **59%** के पांच साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। मिडिल ईस्ट में सप्लाई बाधाओं और **$20/MMBtu** से ऊपर चल रही स्पॉट कीमतों के कारण Indraprastha Gas Limited जैसी कंपनियों को CNG की कीमतें बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ा है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
भारत का विदेशी नेचुरल गैस पर निर्भरता का स्तर जुलाई 2021 के बाद अब अपने उच्चतम स्तर पर है। जुलाई 2026 तक कुल खपत में LNG आयात की हिस्सेदारी बढ़कर 59% हो गई है, जो अप्रैल 2026 में केवल 44% थी। घरेलू स्तर पर गैस उत्पादन मांग के मुकाबले काफी धीमा है, जिसके कारण पूरा सेक्टर ग्लोबल स्पॉट मार्केट की उतार-चढ़ाव भरी कीमतों के प्रति संवेदनशील हो गया है।
संकट की असली वजह
इस संकट की मुख्य जड़ मिडिल ईस्ट में जारी सप्लाई चेन में बड़ी रुकावटें हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे व्यापारिक मार्गों पर भू-राजनीतिक तनाव के कारण भारत को दूरस्थ और महंगे बाजारों से गैस खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच भारत का LNG आयात बिल पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 24% बढ़कर $5.6 बिलियन हो गया है। एनालिस्ट्स का मानना है कि यह स्थिति आगामी सर्दियों तक बनी रह सकती है और 2027 से पहले सप्लाई में सुधार की उम्मीद कम ही है।
कंपनियों के मुनाफे पर असर
सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन, पावर और फर्टिलाइजर जैसे डाउनस्ट्रीम सेक्टर के लिए यह एक कठिन दौर है। कंपनियों के लिए इन बढ़ी हुई कीमतों का बोझ सीधे ग्राहकों पर डालना मुश्किल हो रहा है। इसका सीधा असर Indraprastha Gas Limited के जरिए देखा जा सकता है, जिसने 29 अगस्त 2026 को दिल्ली में CNG की कीमतों में ₹3.89 प्रति किलो की बढ़ोतरी की है।
निवेशकों को अब कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर कड़ी नजर रखनी होगी। आने वाली तिमाहियों में जोखिम यह है कि अगर कंपनियां कीमतों को सही ढंग से एडजस्ट नहीं कर पाईं, तो उनका नेट प्रॉफिट बुरी तरह प्रभावित होगा। इसके अलावा, अमेरिका के अटलांटिक बेसिन जैसे दूरस्थ स्थानों से गैस मंगवाने पर फ्रेट कॉस्ट (freight costs) और ऑपरेशनल जटिलताएं भी बढ़ रही हैं।
