भारत का **500 MW** क्षमता वाला Prototype Fast Breeder Reactor (PFBR) अब अपने अंतिम चरण में है। मार्च 2027 तक इसके पूरी तरह से कमर्शियल होने का लक्ष्य रखा गया है, जो देश की एनर्जी सिक्योरिटी के लिए एक बड़ा कदम है।
भारतीय परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल होने वाली है। Bharatiya Nabhikiya Vidyut Nigam Limited (BHAVINI) के तहत चल रहा कलपक्कम का 500 MW प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर अब अपने लक्ष्य के करीब है। अप्रैल 2026 में इसकी पहली 'क्रिटिकलिटी' (Criticality) सफलता के बाद, अब मार्च 2027 तक इसके कमर्शियल ऑपरेशन की पूरी तैयारी है। यह प्रोजेक्ट भारत के तीन-चरण वाले परमाणु कार्यक्रम का मुख्य आधार है, जिससे देश के विशाल थोरियम भंडार का ऊर्जा उत्पादन में सही इस्तेमाल किया जा सकेगा।
अन्य प्रोजेक्ट्स की रफ्तार
सिर्फ कलपक्कम ही नहीं, Nuclear Power Corporation of India Limited (NPCIL) राजस्थान के RAPP-8 यूनिट समेत कुडनकुलम (तमिलनाडु), कैगा (कर्नाटक) और गोरखपुर (हरियाणा) में भी निर्माण कार्य को तेजी से आगे बढ़ा रही है।
रिटेल निवेशकों के लिए क्या है खास?
हालांकि BHAVINI और NPCIL जैसी कंपनियां शेयर बाजार (NSE/BSE) पर लिस्टेड नहीं हैं, लेकिन इनका सीधा असर मार्केट पर पड़ता है। इन विशाल प्रोजेक्ट्स में हजारों करोड़ रुपये का कैपिटल खर्च होता है, जिसके लिए उन्हें भारी मात्रा में स्टील, इलेक्ट्रिकल पुर्जे और हाई-एंड मशीनरी की जरूरत होती है। ऐसी स्थिति में, पावर इक्विपमेंट और सिविल इंजीनियरिंग से जुड़ी प्राइवेट सेक्टर की कंपनियां, जो इन सरकारी प्रोजेक्ट्स की वेंडर या कॉन्ट्रैक्टर हैं, उनके ऑर्डर बुक में जबरदस्त इजाफा होने की संभावना है।
ध्यान रखें ये रिस्क
SHANTI Act 2025 के नए फ्रेमवर्क के तहत सरकार अपनी क्षमता बढ़ा रही है, लेकिन निवेशकों को यह याद रखना चाहिए कि परमाणु ऊर्जा प्रोजेक्ट्स काफी महंगे होते हैं और इनका 'जेस्टेशन पीरियड' बहुत लंबा होता है। तकनीकी जटिलता के कारण इनमें देरी या लागत बढ़ने का जोखिम हमेशा बना रहता है। फिलहाल, मार्च 2027 की समयसीमा पर बाजार की नजरें टिकी हुई हैं।
