City Gas Sector: पाइपलाइन बिछाने में कंपनियां अव्वल, लेकिन घरों में गैस खपत सुस्त; मुनाफे पर असर

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AuthorAditya Rao|Published at:
City Gas Sector: पाइपलाइन बिछाने में कंपनियां अव्वल, लेकिन घरों में गैस खपत सुस्त; मुनाफे पर असर

भारत का सिटी गैस डिस्ट्रिब्यूशन (CGD) सेक्टर जून 2026 तक **1.74 करोड़** घरेलू कनेक्शन के आंकड़े पर पहुंच गया है। हालांकि, इन्फ्रास्ट्रक्चर में इस भारी निवेश के बावजूद घरों में गैस की खपत स्थिर बनी हुई है, जिससे गैस कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ रहा है।

बुनियादी ढांचे और खपत के बीच बढ़ती खाई

भारत का गैस डिस्ट्रिब्यूशन सेक्टर फिलहाल एक बड़ी वित्तीय चुनौती से गुजर रहा है। जून 2026 तक देश में पाइप नेचुरल गैस (PNG) के 1.74 करोड़ कनेक्शन लग चुके हैं, लेकिन पाइपलाइन बिछाने में किया गया भारी भरकम कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) उस अनुपात में रेवेन्यू नहीं दे पा रहा है। बिजनेस मॉडल इस उम्मीद पर टिका था कि लोग LPG सिलेंडर छोड़कर पाइप गैस अपनाएंगे, लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं हो रहा है।

मार्जिन पर दबाव और घटता मुनाफा

इस अंडर-यूटिलाइजेशन का सीधा असर कंपनियों के बैलेंस शीट पर दिख रहा है। कंपनियों को अक्सर महंगी इंपोर्टेड LNG पर निर्भर रहना पड़ता है, और जब पाइपलाइन का इस्तेमाल कम होता है, तो उनकी लागत निकलना मुश्किल हो जाता है। उदाहरण के तौर पर, Mahanagar Gas का EBITDA मार्जिन FY27 की पहली छमाही में गिरकर 13.2% पर आ गया है, जो कि पिछले साल की समान अवधि में 20.3% था।

निवेशक क्या ट्रैक करें?

कई घरों में सब्सिडी वाली LPG के प्रति लगाव और गैस कीमतों की संवेदनशीलता के कारण यह ट्रांजिशन धीमा है। सरकार ने सितंबर 2026 में कुछ कंपनियों को सस्ती APM गैस के लिए इंसेंटिव भी दिए हैं, लेकिन इसका असर अभी आना बाकी है। निवेशकों को अब केवल कनेक्शन की संख्या नहीं, बल्कि 'यूटिलाइजेशन रेट' पर नजर रखनी चाहिए। यदि खपत नहीं बढ़ती, तो कंपनियों के कैश फ्लो और प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव लंबे समय तक बना रह सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.