OMCs की यह नई रणनीति उनके अपने गहरे वित्तीय संकट का नतीजा है। पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिसकी भरपाई सरकार सीधे तौर पर नहीं कर रही है, जैसा कि एलपीजी (LPG) के मामले में होता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 तक कंपनियों को पेट्रोल पर ₹24.40 प्रति लीटर और डीजल पर ₹104.99 प्रति लीटर का घाटा हो रहा था। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते ब्रेंट क्रूड (Brent crude) की कीमतें $110 प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं, जो मार्च 2026 में $149 तक गई थीं। भारत अपनी 85% क्रूड ऑयल की जरूरत आयात से पूरी करता है, ऐसे में वैश्विक कीमतों में उछाल सीधे तौर पर OMC की लागत बढ़ा देता है। फिच रेटिंग्स (Fitch Ratings) ने मार्च 2026 में ही आगाह किया था कि ऐसी प्राइस शॉक इन कंपनियों के लिए कैश फ्लो की समस्या खड़ी कर सकते हैं। इन कंपनियों पर भारी वर्किंग कैपिटल डेफिसिट (Working Capital Deficit) भी है: इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) पर ₹72,971 करोड़, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) पर ₹17,840 करोड़, और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) पर ₹38,571 करोड़ का बकाया है।
इस वित्तीय दबाव से निपटने के लिए OMCs ने दो-तरफा रणनीति अपनाई है। पहला, 16 मार्च 2026 से वे रिफाइनर्स को पेट्रोल, डीजल और एविएशन फ्यूल (ATF) का भुगतान कम दर पर कर रही हैं। यह डिस्काउंट आयातित लागत से ₹60 प्रति लीटर तक कम हो सकता है, जिससे रिफाइनर्स को बढ़ती वैश्विक कीमतों का बोझ उठाना पड़ता है। यह व्यवस्था OMCs के सेल्स डिवीजन को बढ़ते नुकसान से बचाती है, जबकि खुदरा ईंधन की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। दूसरा, सरकार ने उपभोक्ताओं और OMCs पर बोझ कम करने के लिए पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी (Excise duties) घटाई है। हालांकि, इससे सरकार को हर दो सप्ताह में करीब ₹7,000 करोड़ के राजस्व का नुकसान हो रहा है। सरकार ने घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए डीजल और ATF पर एक्सपोर्ट टैक्स (Export taxes) भी लगाया है।
एनालिस्ट्स (Analysts) की राय बंटी हुई है। जहां मॉर्गन स्टैनली (Morgan Stanley) भारतीय OMCs पर 'ओवरवेट' (Overweight) रेटिंग बनाए हुए है और बेहतर मार्जिन की उम्मीद कर रहा है, वहीं कुछ अन्य अधिक सतर्क हैं। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज (Kotak Institutional Equities) ने OMC स्टॉक्स बेचने की सलाह दी है, जिसका कारण कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, कमजोर रुपया और शिपिंग लागत में वृद्धि है। उनका अनुमान है कि ये कारक फाइनेंशियल ईयर 27 (FY27) में अर्निंग्स (Earnings) को नुकसान पहुंचाएंगे और घाटा भी हो सकता है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज (HDFC Securities) ने अनुमान लगाया है कि प्रॉफिट मार्जिन में ₹1 प्रति लीटर की कमी से IOCL, BPCL और HPCL की FY27 अर्निंग्स पर शेयर (EPS) क्रमशः 21%, 20% और 24% तक घट सकती है। OMCs के लिए सबसे बड़ा जोखिम आयातित कीमतों के प्रति उनकी संवेदनशीलता है, क्योंकि भारत अपनी अधिकांश तेल आपूर्ति आयात करता है। खुदरा ईंधन की कीमतों को स्थिर रखने की सरकारी नीति का मतलब है कि OMCs को कीमतों में किसी भी वृद्धि का खामियाजा खुद भुगतना पड़ता है। मूडीज रेटिंग्स (Moody's Ratings) ने भी लागत और बिक्री मूल्य के बीच इस अंतर के कारण OMC के प्रॉफिट मार्जिन पर बढ़ते दबाव और कम अनुमानित कैश फ्लो की चेतावनी दी है।
बाजार की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही है। 7 अप्रैल 2026 तक, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) ₹132-134 के बीच कारोबार कर रहा था। भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) में ₹271-277 की रेंज में बड़ी गिरावट देखी गई। हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) ₹331-335 के आसपास अपेक्षाकृत स्थिर रहा। अप्रैल 2026 की शुरुआत में, IOCL का मार्केट वैल्यू (Market Value) लगभग ₹1.85 ट्रिलियन था, BPCL का लगभग ₹1.18-1.20 ट्रिलियन, और HPCL का लगभग ₹70 बिलियन था। प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो के मामले में IOCL 5.17-8.07, BPCL 4.8-5.54, और HPCL 4.5-6.91 पर थे। एनालिस्ट्स अक्सर इन आंकड़ों को वैल्यू स्टॉक्स (Value Stocks) का संकेत मानते हैं। भविष्य को देखते हुए, एनालिस्ट्स मिश्रित परिणाम देख रहे हैं। कुछ कर कटौती से मुनाफे में वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं, जबकि अन्य लगातार उच्च क्रूड कीमतों और घटते प्रॉफिट मार्जिन के कारण अर्निंग्स में कटौती और संभावित घाटे की चेतावनी दे रहे हैं।