पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक बड़ा निर्देश जारी किया है, जिसके तहत 1 अप्रैल 2026 से देश भर में 20% इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल (E20) बेचना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, देश में मिलने वाले पेट्रोल के लिए न्यूनतम रिसर्च ऑक्टेन नंबर (RON) 95 निर्धारित किया गया है। यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने की बड़ी योजना का हिस्सा है।
पॉलिसी का मकसद और आर्थिक फायदा
इस E20 पेट्रोल को लागू करने की मुख्य वजह भारत के भारी कच्चे तेल आयात बिल को कम करना और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाना है। सरकार का अनुमान है कि इस पहल से विदेशी मुद्रा में भारी बचत होगी। रिपोर्ट्स के अनुसार, 2014-15 से अब तक इथेनॉल मिश्रण से ₹1.40 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा बचाई गई है। यह पहल कृषि क्षेत्र, खासकर गन्ना किसानों को भी सहारा देगी, क्योंकि इससे उनके उत्पाद की मांग बढ़ेगी।
तेल कंपनियों पर मार्जिन का दबाव
हालांकि, इस नई नीति से तेल विपणन कंपनियों (OMCs) जैसे Indian Oil (IOCL), Bharat Petroleum (BPCL), और Hindustan Petroleum (HPCL) के लिए मुनाफा (Margin) बनाए रखना एक चुनौती बन सकता है। दरअसल, इथेनॉल की खरीद लागत अब रिफाइंड पेट्रोल से भी ज्यादा हो गई है, जो कि ₹71.32 प्रति लीटर (ट्रांसपोर्टेशन और GST सहित) तक पहुंच गई है। ये कंपनियां वैसे भी कम P/E रेशियो (लगभग 6 से 8) पर काम करती हैं, जिससे उनका प्रॉफिट मार्जिन पहले से ही पतला है। लागत बढ़ने पर अगर यह पूरी तरह ग्राहकों पर नहीं डाला गया, तो इनके मुनाफे पर सीधा असर पड़ेगा।
पुरानी गाड़ियों में कंपैटिबिलिटी की चिंता
जहां सरकार E20 को बढ़ावा दे रही है, वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर की तैयारी मिली-जुली है। अप्रैल 2023 के बाद बने ज्यादातर नए वाहन E20 के अनुकूल (compliant) हैं। लेकिन, 2011 से 2025 के बीच बेचे गए पेट्रोल वाहनों का एक बड़ा हिस्सा, जो 80% तक हो सकता है, बिना किसी बदलाव के E20 के साथ ठीक से काम नहीं कर पाएगा। इससे ग्राहकों को फ्यूल सिस्टम को नुकसान, माइलेज में कमी और मेंटेनेंस खर्च बढ़ने जैसी चिंताओं का सामना करना पड़ सकता है।
इथेनॉल सप्लाई चेन और भविष्य की राह
E20 की मांग बढ़ने से भारत का इथेनॉल उत्पादन क्षेत्र मजबूत हुआ है, जिसमें Balrampur Chini Mills, Shree Renuka Sugars और Triveni Engineering & Industries जैसी कंपनियां महत्वपूर्ण सप्लायर हैं। भारत E20 को तेजी से अपना रहा है, जो वैश्विक स्तर पर कई देशों के लिए एक मिसाल है। सरकार इथेनॉल को 'ब्रिज फ्यूल' के तौर पर देख रही है और भविष्य में ई20 से भी आगे के मिश्रण पर विचार कर सकती है। E20 की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि तेल कंपनियां लागत कैसे संभालती हैं, ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री गाड़ियों की कंपैटिबिलिटी कैसे ठीक करती है, और इथेनॉल सप्लाई चेन कितनी मजबूत रहती है।