Energy Security: विदेशी कोयले की निर्भरता कम कर भारत की अर्थव्यवस्था को मिल रहा 'सुरक्षा कवच'

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Energy Security: विदेशी कोयले की निर्भरता कम कर भारत की अर्थव्यवस्था को मिल रहा 'सुरक्षा कवच'

भारत अपनी एनर्जी सिक्योरिटी को मजबूत करने के लिए घरेलू कोयला उत्पादन (Coal Production) पर जोर दे रहा है। यह रणनीति देश को ग्लोबल मार्केट की महंगाई से बचा रही है, जिससे पावर, स्टील और सीमेंट जैसे प्रमुख सेक्टरों को सस्ते ईंधन का आधार मिल रहा है।

ग्लोबल एनर्जी मार्केट में जारी उठा-पटक के बीच भारत ने खुद को सुरक्षित रखने के लिए घरेलू कोयला उत्पादन का रास्ता चुना है। मिनिस्ट्री ऑफ कोल के आंकड़ों के अनुसार, इस रणनीति ने सप्लाई चेन में आ रही रुकावटों को काफी हद तक नियंत्रित किया है। वेस्ट एशिया में जारी जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण जब LNG और LPG की उपलब्धता प्रभावित हुई, तब भारत का 1,041 मिलियन टन का घरेलू उत्पादन बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने में मददगार साबित हुआ।\n\n### बढ़ती कीमतों से बचाव\nइंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के अनुसार, साल 2027 तक ग्लोबल गैस मार्केट में सप्लाई की दिक्कतें बनी रह सकती हैं। इस साल की दूसरी तिमाही में एशियन स्पॉट LNG की कीमतें पिछले साल के मुकाबले 45% बढ़कर USD 17.5 प्रति MBtu तक पहुंच गई थीं। ऐसे में देश में उत्पादित हर एक टन कोयला 'इंपोर्टेड इन्फ्लेशन' (आयातित महंगाई) के खिलाफ एक ढाल का काम कर रहा है।\n\n### लंबी अवधि की मांग और भविष्य की राह\nNITI Aayog के प्रोजेक्शंस के मुताबिक, देश में कोयले की घरेलू मांग जो 2025 में लगभग 1.25 बिलियन टन है, वह 2050 तक 2.6 बिलियन टन के पार जा सकती है। भले ही नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य सामने हो, लेकिन पावर, स्टील और सीमेंट सेक्टर की जरूरतें कम से कम 1.8 बिलियन टन सालाना बनी रहेंगी। फिलहाल भारत अपनी 70% से ज्यादा बिजली कोयले से ही पैदा करता है।\n\n### सस्टेनेबल माइनिंग पर जोर\nअब मिनिस्ट्री ऑफ कोल ने सस्टेनेबल माइनिंग और वैज्ञानिक तरीके से खदानें बंद करने पर ध्यान केंद्रित किया है। खदानों के बंद होने के बाद उस जमीन को स्थानीय समुदायों के लिए उत्पादक बनाने का लक्ष्य रखा गया है। आने वाले समय में चुनौती यह है कि कैसे बढ़ते एनर्जी डिमांड को पूरा करते हुए ग्लोबल क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन के साथ संतुलन बनाया जाए।

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