Crude Oil: भारत का तेल आयात बिल **46%** बढ़ा, $15.4 बिलियन पहुंचा खर्च

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Crude Oil: भारत का तेल आयात बिल **46%** बढ़ा, $15.4 बिलियन पहुंचा खर्च

ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में आई उछाल का असर भारत के बजट पर दिख रहा है। सितंबर महीने में भारत का क्रूड ऑयल इंपोर्ट बिल **46%** बढ़कर **$15.4 बिलियन** के स्तर पर पहुंच गया है।

पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में कच्चे तेल का आयात खर्च $15.4 बिलियन रहा, जबकि पिछले साल इसी महीने में यह आंकड़ा $10.5 बिलियन था। हैरान करने वाली बात यह है कि खपत में बढ़ोतरी महज 7% रही, जिससे साफ है कि यह खर्च वॉल्यूम के बजाय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी कीमतों का परिणाम है।

क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?

सितंबर में भारतीय क्रूड बास्केट की औसत कीमत $116.09 प्रति बैरल दर्ज की गई, जबकि पिछले साल यह $69.61 प्रति बैरल थी। वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव और सप्लाई को लेकर बनी चिंताओं के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगातार अस्थिर बनी हुई हैं।

पहली छमाही का हाल

वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में भारत ने कुल 122.7 MT क्रूड का आयात किया है। इसके लिए देश को $90.6 बिलियन चुकाने पड़े, जो पिछले साल की समान अवधि में $61.9 बिलियन थे। कुल मिलाकर, तेल और गैस का नेट इंपोर्ट बिल 35% उछलकर $81.1 बिलियन हो गया है।

इकोनॉमी और कंपनियों पर असर

क्रूड की इन बढ़ती कीमतों का सीधा असर चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) और रुपये की चाल पर पड़ सकता है। वहीं, इंडियन ऑयल (Indian Oil), HPCL और BPCL जैसी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के लिए मार्जिन का दबाव बढ़ गया है, क्योंकि बढ़ती लागत को पूरी तरह से ग्राहकों पर डालना मुश्किल हो रहा है। निवेशकों की नजरें अब ग्लोबल कीमतों के साथ-साथ सरकार के अगले ट्रेड डेटा पर टिकी हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.