कोयले के इंपोर्ट पर भारत का बड़ा दांव! पावर प्लांट्स को सता रही महंगी लागत की चिंता

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
कोयले के इंपोर्ट पर भारत का बड़ा दांव! पावर प्लांट्स को सता रही महंगी लागत की चिंता
Overview

भारत सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए थर्मल कोयला आयात में कम से कम **30%** की कटौती करने का लक्ष्य रखा है। इसका मतलब है कि देश अब सालाना **1.5 करोड़ टन** कोयले का इंपोर्ट कम करेगा, जबकि घरेलू उत्पादन पर निर्भरता बढ़ाई जाएगी।

सरकार का बड़ा फैसला

सरकार की यह बड़ी पहल देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और घरेलू कोयला उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए है। इस कदम से आयातित कोयले पर निर्भरता कम होगी और Coal India जैसी सरकारी कंपनियों के विशाल भंडार का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा।

पावर प्लांट्स के लिए नई चुनौती

हालांकि, इस फैसले से देश के पावर प्लांट्स के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। उन्हें अब लोकल क्वालिटी के कोयले का इस्तेमाल करने के लिए अपने बॉयलर में बड़े बदलाव करने होंगे। पावर प्रोड्यूसर्स का कहना है कि इन बदलावों में भारी लागत आएगी। खासकर, करीब 17 गीगावॉट बिजली उत्पादन क्षमता ऐसे प्लांट्स के लिए बनाई गई थी जो खास तौर पर इंपोर्टेड कोयले पर निर्भर थे।

Coal India की स्थिति

दूसरी ओर, सरकारी कंपनी Coal India को घरेलू मांग बढ़ने का फायदा मिल सकता है। कंपनी के पास रिकॉर्ड उत्पादन के बाद करीब 9 करोड़ टन कोयले का स्टॉक पड़ा है। हालांकि, फरवरी 2026 के अंत में कंपनी के शेयर की कीमत ₹427-₹433 के बीच रही, जो इसके 52-हफ्ते के दायरे ₹352.40 से ₹461.55 के भीतर है। Coal India का मार्केट कैप लगभग ₹2.63 लाख करोड़ है।

रिन्यूएबल एनर्जी का बढ़ता दबदबा

यह सब तब हो रहा है जब भारत तेजी से रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) की ओर बढ़ रहा है। 2026 की शुरुआत तक, देश की कुल स्थापित क्षमता का 40% रिन्यूएबल एनर्जी से आ रहा है। सौर ऊर्जा (Solar Power) की लागत कोयले से बनने वाली बिजली से आधी हो गई है, जिससे यह सबसे सस्ता विकल्प बन गया है। इस बदलाव के चलते थर्मल कोयले के इंपोर्ट में कमी आने की उम्मीद है, और इसका इस्तेमाल सीमेंट व स्टील जैसे उद्योगों में बढ़ सकता है।

भविष्य की राह और जोखिम

विश्लेषकों का मानना है कि सरकार के इस फैसले में सबसे बड़ा जोखिम लागत की व्यवहार्यता (economic viability) का है। पावर प्लांट के बॉयलर को बदलने का खर्च, इंपोर्ट सस्ता होने पर भी, बहुत ज्यादा हो सकता है। इसके अलावा, अगर घरेलू कोयले की क्वालिटी उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी, तो प्रोडक्शन में दिक्कतें आ सकती हैं। पिछले 5 सालों में Coal India की बिक्री ग्रोथ सिर्फ 8.33% रही है, जो ओवरसप्लाई (oversupply) का संकेत देती है। रिन्यूएबल एनर्जी का बढ़ता प्रभुत्व कोयले के भविष्य के लिए एक बड़ी चुनौती है। Coal India के लिए एनालिस्ट्स की राय मिली-जुली है, अधिकतर 'HOLD' पर हैं। उनका अनुमान है कि शेयर 417.71 रुपये तक जा सकता है, जो मौजूदा स्तर से -2.52% नीचे है।

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