India Emissions Update: 2025 में मिली बड़ी कामयाबी, पर 2026 में क्यों बढ़ गई टेंशन?

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
India Emissions Update: 2025 में मिली बड़ी कामयाबी, पर 2026 में क्यों बढ़ गई टेंशन?

साल 2025 में भारत ने आर्थिक विकास और कार्बन उत्सर्जन को अलग करने (Decoupling) में बड़ी सफलता हासिल की थी, लेकिन 2026 के आंकड़े अब चिंता बढ़ा रहे हैं। उत्सर्जन में फिर से **3.7%** की बढ़ोतरी देखी गई है, जो एनर्जी ट्रांजिशन की चुनौतियों को दर्शाता है।

साल 2025 भारत के लिए एक ऐतिहासिक साल रहा। पहली बार ऐसा हुआ कि देश की इकॉनमी 7.6% की रफ्तार से दौड़ी, जबकि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 0.2% की गिरावट दर्ज की गई। पिछले 25 वर्षों में यह पहली बार था जब विकास और प्रदूषण का ग्राफ अलग दिशा में गया, जो देश की क्लीनर औद्योगिक दिशा की ओर कदम को दर्शाता है।

2025 का गेम चेंजर: पावर सेक्टर

इस उपलब्धि के पीछे सबसे बड़ी वजह पावर सेक्टर का ट्रांसफॉर्मेशन रहा। देश की कुल बिजली आपूर्ति में लो-कार्बन सोर्स की हिस्सेदारी बढ़कर 26.6% पहुंच गई, जो पिछले साल 22.4% थी। इस बदलाव से कोयले की मांग पर असर पड़ा और कोयले से बिजली बनाने में 2.9% की गिरावट आई, जिससे निवेशकों को लगा कि स्ट्रक्चरल बदलाव की शुरुआत हो चुकी है।

2026 में आई बाधाएं

हालांकि, 2026 की शुरुआत होते ही तस्वीर बदलने लगी। साल के पहले हिस्से में उत्सर्जन में 3.7% की उछाल ने पिछले साल की बढ़त को खत्म कर दिया। इसके मुख्य विलेन स्टील और सीमेंट जैसे कार्बन-इंटेंसिव सेक्टर बने, जिन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए उत्पादन तेज कर दिया है।

मामला तब और बिगड़ा जब सितंबर 2026 में Bureau of Energy Efficiency (BEE) ने रिफाइनरी और टेक्सटाइल सेक्टर के लिए अनिवार्य एमिशन टारगेट को सस्पेंड कर दिया। आर्थिक दबाव और ग्लोबल सप्लाई चेन में दिक्कतों के कारण सरकार ने यह नीतिगत कदम पीछे खींचा, जो यह बताता है कि सरकार के लिए जलवायु लक्ष्य और आर्थिक स्थिरता के बीच संतुलन बनाना कितना मुश्किल है।

निवेशकों के लिए संकेत

भारत की कोयले पर निर्भरता अब भी सबसे बड़ी चुनौती है। जब तक एनर्जी स्टोरेज और ग्रिड ट्रांसमिशन में भारी निवेश नहीं होता, तब तक पीक डिमांड के समय कोयले का इस्तेमाल मजबूरी बना रहेगा। भारत का लक्ष्य 2035 तक अपनी एमिशन इंटेंसिटी को 2005 के स्तर से 47% कम करने का है, लेकिन मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी एक बड़ी बाधा बनी हुई है। निवेशकों को अब BEE के नए सेक्टर-स्पेसिफिक टारगेट और एनर्जी स्टोरेज टेक्नोलॉजी में होने वाले अपडेट्स पर बारीक नजर रखनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.