Advanced Chemistry Cell (ACC) PLI स्कीम के तहत आखिरी **10 GWh** के लिए बिडिंग की डेडलाइन आज **13 अक्टूबर** को खत्म हो रही है। हालांकि, तकनीकी सवालों पर सरकार की तरफ से स्पष्ट जवाब न मिलने से इंडस्ट्री में चिंता है।
भारी उद्योग मंत्रालय (Ministry of Heavy Industries) के लिए आज 13 अक्टूबर 2026 की तारीख एक बड़ा पड़ाव है, क्योंकि यह एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) मैन्युफैक्चरिंग इंसेंटिव प्रोग्राम के आखिरी 10 GWh हिस्से के लिए बिडिंग की आखिरी डेडलाइन है। यह टेंडर भारत के 50 GWh नेशनल प्रोग्राम ऑन एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल बैटरी स्टोरेज का एक अहम हिस्सा है, जिसका लक्ष्य देश में ही बैटरी निर्माण को बढ़ावा देना है।
तकनीकी सवालों पर चुप्पी से बढ़ी टेंशन
इस डेडलाइन से पहले का माहौल काफी संशय भरा रहा है। कंपनियां तकनीकी बारीकियों को लेकर उलझन में हैं। बिडर्स ने वेनेडियम रेडॉक्स फ्लो बैटरी (Vanadium Redox Flow Batteries) जैसी गैर-लिथियम तकनीकों पर सब्सिडी की गणना और ग्रिड-स्केल स्टोरेज के ऑडिट जैसे मुद्दों पर सैकड़ों सवाल उठाए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन पर मिले जवाब काफी 'स्टैंडर्ड' रहे, जिससे कंपनियों को अपने कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) प्लान को अंतिम रूप देने में मुश्किल हो रही है।
पिछले रिकॉर्ड ने बढ़ाई चिंता
निवेशकों की चिंता के पीछे एक बड़ा कारण पहले के राउंड्स की धीमी रफ्तार भी है। सरकार ने अब तक कुल 40 GWh क्षमता आवंटित की है, लेकिन 2026 के मध्य तक इसमें से केवल 1.4 GWh क्षमता ही काम कर रही है। यह अंतर दिखाता है कि सप्लाई चेन की अड़चनों और घरेलू वैल्यू एडिशन की शर्तों को पूरा करना कंपनियों के लिए कितनी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
अब आगे क्या होगा?
मार्केट की नजरें अब 14 अक्टूबर 2026 को होने वाली टेक्निकल बिड ओपनिंग पर टिकी हैं। बिडर्स की संख्या यह तय करेगी कि मौजूदा रेगुलेटरी ढांचे पर निवेशकों का कितना भरोसा है। यदि भागीदारी कमजोर रही, तो मंत्रालय को अपनी कम्युनिकेशन स्ट्रैटेजी बदलनी पड़ सकती है या टेंडर की शर्तों में सुधार करना पड़ सकता है।
