Indian Oil Corporation (IOCL) ने 2030 तक नेचुरल गैस की बिक्री को बढ़ाकर **10.5 मिलियन टन** करने का लक्ष्य रखा है। हालांकि, कंपनी फिलहाल ऊंचे कच्चे तेल की कीमतों और जियोपॉलिटिकल रिस्क के कारण जून 2026 तिमाही में हुए **₹2,661 करोड़** के नेट लॉस से जूझ रही है।
Indian Oil Corporation (IOCL) ने खुद को एक पारंपरिक रिफाइनर से एक इंटीग्रेटेड एनर्जी यूटिलिटी कंपनी में बदलने का रोडमैप तैयार कर लिया है। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में 7.09 मिलियन टन की रिकॉर्ड गैस बिक्री के बाद, अब कंपनी ने 2030 तक इसे 10.5 मिलियन टन तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए कंपनी सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD), पाइपलाइन्स और LNG टर्मिनल्स में भारी निवेश कर रही है।
मुनाफे पर दबाव और चुनौतियां
कंपनी के विजन के बीच मौजूदा आर्थिक चुनौतियां भी साफ दिख रही हैं। फाइनेंशियल ईयर 2026-27 की पहली तिमाही में IOCL को ₹2,661 करोड़ का नेट लॉस हुआ है, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी ₹5,689 करोड़ के मुनाफे में थी। इसका मुख्य कारण वेस्ट एशिया में चल रही जियोपॉलिटिकल अस्थिरता और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतें हैं।
पेट्रोकेमिकल्स पर फोकस और कर्ज का बोझ
IOCL अपनी पेट्रोकेमिकल इंटेंसिटी को मौजूदा 6% से बढ़ाकर 2030 तक 15% करने की योजना बना रही है, ताकि रिफाइनिंग मार्जिन के उतार-चढ़ाव से बचा जा सके। हालांकि, इन बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए भारी कैपिटल खर्च की जरूरत है, जिसके चलते कंपनी का कर्ज ₹141,453 करोड़ के ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है।
रिस्क और निवेशकों के लिए ध्यान रखने वाली बातें
कंपनी का 45% क्रूड और 90% LPG आयात 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) के जरिए होता है, जो इसे ग्लोबल टेंशन के प्रति संवेदनशील बनाता है। हालांकि, हालिया सप्लाई चेन बाधाओं के बावजूद कंपनी ने LPG उत्पादन 30% बढ़ाकर अपनी मजबूती दिखाई है। भविष्य में निवेशकों को कंपनी की मार्जिन रिकवरी और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की प्रोग्रेस पर नजर रखनी चाहिए। कंपनी ने फिलहाल बोनस शेयर लाने की किसी भी योजना से इनकार किया है, जिससे कैपिटल स्ट्रक्चर को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है।
