Indian Oil, HPCL और BPCL जैसे सरकारी तेल दिग्गज अब इस्तेमाल किए हुए कुकिंग ऑयल को इकट्ठा करने का एक बड़ा नेटवर्क खड़ा कर रहे हैं। जनवरी से शुरू हो रहे सरकार के **1%** सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) मैंडेट को पूरा करने के लिए कंपनियों को सप्लाई चेन की बड़ी चुनौतियों से पार पाना होगा।
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम तेजी से सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) के उत्पादन के लिए इस्तेमाल किए हुए कुकिंग ऑयल को जुटाने की कवायद में लगे हैं। सरकार की ग्रीन एनर्जी पॉलिसी के तहत, जनवरी से भारत से उड़ान भरने वाली अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स के लिए 1% सस्टेनेबल फ्यूल का इस्तेमाल अनिवार्य है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत के क्रूड ऑयल इंपोर्ट बिल में कमी लाना है, जो देश की इकोनॉमी पर बड़ा दबाव बनाता है।
लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन की चुनौती
भारत में सालाना लगभग 30 लाख टन वेस्ट कुकिंग ऑयल निकलता है, लेकिन इसे जुटाने का सिस्टम अभी भी काफी बिखरा हुआ है। बड़ी मात्रा में यह तेल अवैध तरीकों से वापस फूड चेन में चला जाता है, जिससे रिफाइनरियों के लिए सही फीडस्टॉक जुटाना मुश्किल होता है। अब ये कंपनियां एक डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम विकसित कर रही हैं ताकि एविएशन-ग्रेड फ्यूल के कड़े क्वालिटी स्टैंडर्ड्स को पूरा किया जा सके।
निवेशकों के लिए क्या है वॉचलिस्ट?
निवेशकों के नजरिए से यह कदम बिजनेस मॉडल में एक बड़ा बदलाव है। हालांकि, यह प्रोजेक्ट काफी कैपिटल-इंटेंसिव है। हजारों रेस्टोरेंट्स और फूड प्रोसेसरों से तेल इकट्ठा करने के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करना और फीडस्टॉक की कीमतों में उतार-चढ़ाव को मैनेज करना एक जोखिम है।
आने वाले समय में, बाजार इस बात पर नजर रखेगा कि क्या ये कंपनियां बिना इंपोर्ट पर निर्भर रहे, अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को स्केल कर पाती हैं या नहीं। कंपनियों के अगले क्वार्टरली नतीजों और मैनेजमेंट गाइडेंस में यह साफ होगा कि सप्लाई चेन को फॉर्मल बनाने की लागत का उनके प्रॉफिट मार्जिन पर कितना असर पड़ रहा है।
