Indian Solar Makers: अमेरिका ने लगाया 249% का ड्यूटी बम, सोलर कंपनियों के लिए बड़ी मुश्किल

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Indian Solar Makers: अमेरिका ने लगाया 249% का ड्यूटी बम, सोलर कंपनियों के लिए बड़ी मुश्किल

अमेरिकी सरकार ने भारतीय सोलर इंपोर्ट्स पर भारी-भरकम एंटी-डंपिंग और काउंटरवेलिंग ड्यूटी लगा दी है। यह फैसला उन कंपनियों के लिए बड़ा झटका है जो अपने एक्सपोर्ट का 95% हिस्सा अमेरिका भेजती थीं। अब निवेशक यह देख रहे हैं कि कंपनियां घरेलू बाजार में कैसे खुद को एडजस्ट करती हैं।

अमेरिकी कॉमर्स डिपार्टमेंट द्वारा फाइनल किए गए नए टैरिफ नियमों ने भारतीय सोलर मैन्युफैक्चरर्स के लिए चुनौतियां बढ़ा दी हैं। एंटी-डंपिंग ड्यूटी के तौर पर 123.04% और काउंटरवेलिंग ड्यूटी के तौर पर 126.09% की दर तय की गई है, जिससे कुल टैक्स का बोझ 249% के पार पहुंच गया है। यह कदम अमेरिका के दरवाजे भारतीय सोलर मॉड्यूल्स के लिए लगभग बंद करने जैसा है।

एक्सपोर्ट स्ट्रैटेजी पर असर

जिन कंपनियों का पूरा बिजनेस मॉडल अमेरिकी बाजार पर आधारित था, उन्हें अब अपनी रणनीति तुरंत बदलनी होगी। अमेरिकी बाजार का रास्ता बंद होने से रेवेन्यू पर दबाव पड़ना तय है, जिससे कंपनियों को अब वैकल्पिक रास्तों की तलाश करनी होगी।

घरेलू बाजार पर फोकस

अब कंपनियों की नजर भारत के अपने बाजार पर है। सरकार की 'Approved List of Models and Manufacturers' (ALMM) पॉलिसी यहाँ एक सहारा जरूर है, क्योंकि सरकारी प्रोजेक्ट्स के लिए भारतीय मॉड्यूल्स अनिवार्य हैं। हालांकि, क्या 242.7 GW की कैपेसिटी (जो Q2 2026 तक पहुंच चुकी है) को घरेलू मांग पूरी तरह सोख पाएगी, यह बड़ा सवाल है। अगर मांग कम रही, तो भारत में ही प्राइस वॉर छिड़ने का खतरा है।

फाइनेंशियल और ऑपरेशनल रिस्क

निवेशक मार्जिन पर होने वाली मार को लेकर भी सतर्क हैं। जो कंपनियां सोलर सेल्स और वेफर्स के मामले में आत्मनिर्भर नहीं हैं, उनके लिए कॉस्ट कंट्रोल करना मुश्किल होगा। Vikram Solar जैसी कंपनियों ने भले ही बड़े डोमेस्टिक ऑर्डर हासिल किए हों, लेकिन ओवरकैपेसिटी का जोखिम पूरे सेक्टर पर बना हुआ है।

अब आगे क्या?

मामला अभी पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। US International Trade Commission 14 अक्टूबर 2026 को अपनी फाइनल इंजरी डिटरमिनेशन रिपोर्ट जारी करेगा। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो नवंबर 2026 तक औपचारिक ड्यूटी ऑर्डर लागू हो जाएंगे। निवेशकों को कंपनियों के मैनेजमेंट कमेंट्री और आने वाले महीनों में उनके कैपेसिटी यूटिलाइजेशन प्लान पर बारीक नजर रखनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.