Indian Refiners: क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों से रिफाइनर्स पर मार, मार्जिन पर दबाव

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AuthorAditya Rao|Published at:
Indian Refiners: क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों से रिफाइनर्स पर मार, मार्जिन पर दबाव

भारतीय रिफाइनर्स के लिए कच्चे तेल की खरीद महंगी होती जा रही है। क्रूड के स्पॉट प्राइस और फ्यूचर्स के बीच का अंतर **$22** प्रति बैरल तक पहुंच गया है, जिससे कंपनियों के मुनाफे यानी मार्जिन पर भारी दबाव दिख रहा है।

स्पॉट और फ्यूचर्स का बड़ा फासला

आमतौर पर मार्केट में Brent क्रूड के फ्यूचर्स रेट्स को ही तेल की कीमतों का पैमाना माना जाता है, लेकिन भारतीय कंपनियों के लिए असल मुसीबत कुछ और है। 1 सितंबर से 22 सितंबर के बीच Brent क्रूड के स्पॉट प्राइस नवंबर फ्यूचर्स के मुकाबले करीब $12 प्रति बैरल महंगे रहे। 15 सितंबर को तो यह अंतर रिकॉर्ड $22 प्रति बैरल तक पहुंच गया, जिसकी बड़ी वजह गल्फ देशों में सप्लाई की कमी है।

कंपनियों के मुनाफे पर कैसे हो रही है चोट?

रिफाइनर्स का क्रूड खरीदना फ्यूचर्स मार्केट के बजाय फिजिकल मार्केट के भाव से जुड़ा होता है। कंपनियां अक्सर 2 महीने पहले ही खरीद के एग्रीमेंट कर लेती हैं, लेकिन जब डिलीवरी का समय आता है और इनवॉइस हाथ में आता है, तो उसमें भारी प्रीमियम जुड़ा होता है।

इसका सीधा असर GRM (Gross Refining Margin) पर पड़ रहा है। Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum, Hindustan Petroleum और Reliance Industries जैसी बड़ी कंपनियों के लिए चुनौती यह है कि कच्चे तेल की लागत तो बढ़ गई है, लेकिन पेट्रोल-डीजल के रिटेल भाव में उस हिसाब से बढ़ोतरी करना मुश्किल है।

निवेशकों के लिए आगे क्या?

निवेशकों को अब आने वाली तिमाही नतीजों में कंपनियों के मैनेजमेंट की कमेंट्री पर नजर रखनी चाहिए। बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सप्लाई चेन की दिक्कतें अस्थायी हैं या कच्चे तेल की ऊंची लागत का दौर लंबा चलेगा। अगर यह प्रीमियम बना रहता है, तो उम्मीद से कमजोर अर्निंग्स देखने को मिल सकती हैं, भले ही ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल के दाम स्थिर दिख रहे हों।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.