Crude Oil Crisis: ईरान-अमेरिका तनाव से भारतीय रिफाइनर्स की बढ़ी टेंशन, महंगा होगा तेल

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AuthorNeha Patil|Published at:
Crude Oil Crisis: ईरान-अमेरिका तनाव से भारतीय रिफाइनर्स की बढ़ी टेंशन, महंगा होगा तेल

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब तेल की सप्लाई पर दिखने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में टैंकरों की आवाजाही बाधित होने से IOCL और BPCL जैसी भारतीय कंपनियों के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति में देरी हो रही है।

ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव ने दुनिया भर की एनर्जी सप्लाई चेन को हिलाकर रख दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण रास्तों में से एक है, वहां हलचल तेज होने से भारतीय रिफाइनर्स को कार्गो में देरी और कुछ क्रूड ऑयल कॉन्ट्रैक्ट्स रद्द होने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

कंपनियों पर दबाव

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) जैसी सरकारी तेल कंपनियों के लिए यह एक बड़ी ऑपरेशनल चुनौती है। रिफाइनरीज को बिना रुके चलने के लिए कच्चे तेल के निरंतर प्रवाह की आवश्यकता होती है, लेकिन टैंकरों की भारी कमी ने स्थिति को जटिल बना दिया है। जोखिम वाले इलाकों से बचने के चक्कर में जहाजों को अब लंबे और महंगे रास्तों से गुजरना पड़ रहा है, जिससे फ्रेट (Freight) लागत में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है।

निवेशकों के लिए क्यों है यह चिंता की बात?

ब्रेंट क्रूड के दाम अब $95 प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गए हैं। यदि रिफाइनर्स को स्पॉट मार्केट से महंगे दाम पर तेल खरीदना पड़ा, तो इसका सीधा असर उनके क्वार्टरली अर्निंग्स और प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ेगा। इसके अलावा, बढ़ता इंपोर्ट बिल भारतीय रुपये पर दबाव डाल रहा है, जो देश में महंगाई (Inflation) को और बढ़ा सकता है।

क्या भारत सुरक्षित है?

राहत की बात यह है कि भारत के पास अभी 18 दिनों की जरूरत के बराबर स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व मौजूद है। इसके अलावा, अगस्त में कुल आयात का करीब 45% हिस्सा रूस से आया था, जिसने खाड़ी देशों पर निर्भरता को कम किया है। हालांकि, निवेशकों को अब होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिरता और ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतों पर नजर रखनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.