भारत ने अगस्त महीने में रूस से होने वाले कच्चे तेल के आयात में **16.5%** की कटौती की है। अमेरिकी व्यापार नीतियों से जुड़ी अनिश्चितताओं के बीच रिफाइनर्स अब मिडिल ईस्ट (Middle East) से सप्लाई बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।
आयात में आया बड़ा बदलाव
अगस्त के आंकड़ों के मुताबिक, भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात घटकर लगभग 21 लाख बैरल प्रति दिन रह गया है। अब तक भारतीय कंपनियों ने रूसी तेल पर मिल रहे भारी डिस्काउंट का जमकर फायदा उठाया है, जिसने कंपनियों के मुनाफे को नई ऊंचाई दी है। लेकिन अब, भू-राजनीतिक जोखिमों को कम करने के लिए रिफाइनर्स अपने सोर्स का डायवर्सिफिकेशन (Diversification) कर रहे हैं।
मिडिल ईस्ट पर बढ़ता भरोसा
सप्लाई चेन को बेहतर बनाने के लिए अब Abu Dhabi National Oil Company अपनी सप्लाई लाइन्स को चुस्त-दुरुस्त कर रही है। इसी के चलते अगस्त में इराक से होने वाले तेल आयात में करीब 25% का उछाल देखा गया, जो बढ़कर 1,71,000 बैरल प्रति दिन पहुंच गया है।
अमेरिकी टैरिफ का डर
इस सतर्कता की सबसे बड़ी वजह अमेरिका की नई व्यापार नीतियां हैं। ऐसी चर्चाएं हैं कि अमेरिका उन देशों पर टैरिफ लगा सकता है जो रूसी तेल का आयात जारी रखते हैं। हालांकि भारत अपनी एनर्जी सिक्योरिटी को प्राथमिकता देता है, लेकिन संभावित व्यापारिक प्रतिबंधों के डर ने रिफाइनर्स को एक ही सोर्स पर निर्भरता कम करने पर मजबूर कर दिया है।
निवेशकों पर क्या होगा असर?
इस बदलाव का सबसे सीधा असर ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) पर पड़ सकता है। यदि कंपनियां अब डिस्काउंटेड रूसी तेल के बजाय महंगे मिडिल ईस्ट तेल की ओर शिफ्ट होती हैं, तो Indian Oil Corporation, BPCL, HPCL और Reliance Industries जैसे दिग्गजों के मार्जिन पर दबाव दिख सकता है। कुल तेल आयात भी अगस्त में 8.8% घटकर 44.4 लाख बैरल प्रति दिन रहा। अब निवेशकों की नजरें कंपनियों की अगली अर्निंग कॉल और मैनेजमेंट की कमेंट्री पर होंगी कि वे इस लागत और रिस्क के बीच संतुलन कैसे बैठाते हैं।
