Brent Crude के भाव **$97** प्रति बैरल के करीब पहुंचने और LNG की कीमतों में उछाल से Indian Oil Marketing Companies (OMCs) के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। रिटेल पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रहने और इनपुट कॉस्ट बढ़ने के कारण कंपनियों के मार्जिन पर गहरा असर पड़ रहा है।
मुनाफे पर क्यों है मार?
ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भारतीय सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) के लिए चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भू-राजनीतिक तनाव के चलते Brent Crude का भाव $97 प्रति बैरल के स्तर के करीब पहुंच चुका है। हालांकि रिफाइनिंग मार्जिन अभी भी मजबूत बना हुआ है, लेकिन मार्केटिंग मार्जिन का हाल बेहाल है।
नेगेटिव मार्जिन का गणित
पेट्रोल और डीजल की बिक्री से होने वाला मुनाफा अब नेगेटिव (Negative) हो चुका है। चूंकि रिटेल फ्यूल प्राइसेज में कोई बदलाव नहीं हुआ है, इसलिए कंपनियों की लागत और कमाई के बीच का अंतर बढ़ गया है। वहीं, एशियाई मार्केट में Spot LNG की कीमतें $24 प्रति MMBtu तक पहुंच गई हैं, जो पिछले साल के मुकाबले 60% की भारी बढ़त है।
सप्लाई चेन का बदलता स्वरूप
LPG सप्लाई चेन को दुरुस्त रखने के लिए कंपनियों को अब पश्चिम एशिया के बजाय अमेरिका जैसे दूरस्थ देशों से आयात करना पड़ रहा है। इससे फ्रेट (भाड़ा) की लागत बढ़ गई है और शिपिंग का समय भी ज्यादा लग रहा है, जो सीधे तौर पर कंपनी के वर्किंग कैपिटल पर दबाव डाल रहा है।
निवेशकों के लिए संकेत
अब सबकी निगाहें IOCL, BPCL और HPCL के आने वाले नतीजों पर टिकी हैं। निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनियां किस तरह इन्वेंट्री लॉस और बढ़ती इनपुट कॉस्ट के बीच अपने कैश फ्लो को मैनेज करती हैं। फिलहाल के लिए, बाजार में बढ़ती अनिश्चितता और सप्लाई चेन में हो रही दिक्कतें इन कंपनियों के शेयर प्राइस पर दबाव बनाए रख सकती हैं।
