रिकॉर्ड परफॉरमेंस से मुनाफे का अंबार
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने अपने रिफाइनिंग और मार्केटिंग ऑपरेशंस में रिकॉर्ड परफॉरमेंस के दम पर गजब के वित्तीय नतीजे घोषित किए हैं। कंपनी का मार्च तिमाही का नेट प्रॉफिट 56% बढ़कर ₹11,377.51 करोड़ हो गया। वहीं, पूरे फाइनेंशियल ईयर 2025-26 (FY26) के लिए कंपनी का सालाना नेट प्रॉफिट दोगुना से भी ज्यादा होकर ₹36,802.42 करोड़ पर पहुंच गया। कंपनी की रिफाइनरियों में क्रूड का रिकॉर्ड थ्रूपुट, मजबूत पाइपलाइन ऑपरेशंस और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की रिकॉर्ड बिक्री ने इन नतीजों को सहारा दिया। लुब्रिकेंट्स और पेट्रोकेमिकल्स बिजनस ने भी शानदार प्रदर्शन किया।
शेयर में गिरावट की कहानी
इन शानदार ऑपरेशंस के बावजूद, IOC का स्टॉक 2026 में अब तक 24% तक गिर चुका है। शेयर की कीमत हाल ही में ₹131.81 के आसपास ट्रेड कर रही थी। इसी बीच, निफ्टी एनर्जी इंडेक्स भी 0.66% नीचे कारोबार कर रहा था। कंपनी अपने ऑपरेशनल भरोसेमंदता और रिटेल नेटवर्क के विस्तार पर लगातार काम कर रही है, जो इसे ग्लोबल एनर्जी मार्केट की उठापटक के बीच मजबूती देता है।
कम वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा स्टॉक
IOC का स्टॉक फिलहाल 5.1x से 5.7x के प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो पर ट्रेड कर रहा है। यह भारतीय ऑयल एंड गैस इंडस्ट्री के औसत 20.4x और पीयर कंपनियों के औसत 11.3x से काफी कम है। यह कम वैल्यूएशन बताता है कि मार्केट इन जोखिमों को भुना रहा है, खासकर सब्सिडाइज्ड फ्यूल बेचने से होने वाले वित्तीय दबाव को। अपने ऑपरेशनल अचीवमेंट्स के बावजूद, IOC का P/E रेशियो बताता है कि इसे एक वैल्यू स्टॉक माना जा रहा है, जिसकी कमाई की क्षमता और इंडस्ट्री के साथियों की तुलना में यह शायद अंडरवैल्यूड है।
सब्सिडाइज्ड फ्यूल बिक्री का भारी बोझ
IOC और अन्य सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के लिए सबसे बड़ी चुनौती पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी को उनकी लागत से कम कीमत पर बेचना है। मार्च 2026 में यह स्थिति और बिगड़ गई। IOC को घरेलू एलपीजी बिक्री पर हुए नुकसान की भरपाई के लिए FY25-26 के लिए ₹30,000 करोड़ का मुआवजा मिला। हालांकि, सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) पर हुए नुकसान के लिए कोई वित्तीय सहायता नहीं दी है। अनुमान है कि जब क्रूड ऑयल की कीमतें $110 प्रति बैरल से ऊपर गईं, तब से OMCs का घाटा ₹75,000 करोड़ से ₹1 लाख करोड़ तक हो सकता है। ऐसे में यह जोखिम है कि FY27 की पहली तिमाही में होने वाला घाटा FY26 के सारे मुनाफे को खत्म कर सकता है।
एनालिस्ट्स की राय और भविष्य
ज्यादातर एनालिस्ट्स (Analysts) IOC पर पॉजिटिव राय रखते हैं, जिनकी 'बाय' (Buy) रेटिंग है। 12 महीने के एवरेज टारगेट प्राइस ₹147.50 से लेकर ₹179.85 तक का अपसाइड पोटेंशियल दिख रहा है। हालांकि, कुछ एनालिस्ट्स ने मार्जिन प्रेशर की चिंताओं के चलते मार्च 2026 में IOC की रेटिंग को 'न्यूट्रल' (Neutral) कर दिया था। 2026 के लिए पूरे साल की कमाई का अनुमान मजबूत है, लेकिन 2027 के लिए अनुमानों में गिरावट आ सकती है। कंपनी का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि वह वोलेटाइल ग्लोबल एनर्जी मार्केट्स और सरकारी प्राइसिंग पॉलिसीज से कैसे निपटती है। वेस्ट एशिया में चल रहे संघर्ष का अप्रैल-जून तिमाही पर असर पड़ने की उम्मीद है।