Indian Oil Corporation (IOC) अपने मैनेजमेंट ढांचे में बड़ा बदलाव कर रही है। अब कंपनी 'प्रोजेक्ट स्प्रिंट' (Project Sprint) के तहत नए एनर्जी सेक्टर में उतरने की तैयारी में है। हालांकि, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण कंपनी को फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में **₹2,661 करोड़** का नेट लॉस हुआ है।
मैनेजमेंट में बड़े बदलाव
Indian Oil अब एक नए दौर की ओर बढ़ रही है। कंपनी अपने पुराने फंक्शनल डायरेक्टर मॉडल को बदलकर अब एक नया स्ट्रक्चर ला रही है, जिसमें एक एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के अंडर चार मैनेजिंग डायरेक्टर्स काम करेंगे। यह बदलाव इसलिए किया गया है ताकि कंपनी डेटा सेंटर्स, न्यूक्लियर पावर, शिपिंग और बैटरी मैन्युफैक्चरिंग जैसे नए क्षेत्रों में तेजी से निर्णय ले सके।
इसके साथ ही, कंपनी ने भर्ती प्रक्रिया में भी बदलाव किया है। अब GATE परीक्षा की जगह कंपनी अपनी खुद की परीक्षा लेगी ताकि नए टैलेंट को कंपनी के कामकाज के हिसाब से बेहतर ढंग से ढाला जा सके। ये सब 'प्रोजेक्ट स्प्रिंट' (Project Sprint) का हिस्सा है, जिसे अप्रैल 2025 में लॉन्च किया गया था। इसका मुख्य मकसद कंपनी की प्रोडक्टिविटी बढ़ाना और साल 2047 तक नेट-जीरो एमिशन का टारगेट हासिल करना है।
खराब नतीजों का असर
कंपनी के लिए वित्तीय मोर्चे पर यह समय काफी चुनौतीपूर्ण रहा है। पहली तिमाही में ₹2,661 करोड़ का नुकसान हुआ है, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी ने ₹5,689 करोड़ का मुनाफा कमाया था। इसकी मुख्य वजह रिफाइनिंग मार्जिन पर दबाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें हैं। 10 सितंबर, 2026 तक कंपनी का शेयर लगभग ₹135 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था।
निवेशकों के लिए जोखिम
एक्सपर्ट्स का मानना है कि कंपनी का नए क्षेत्रों (जैसे माइनिंग और न्यूक्लियर पावर) में विस्तार करना फायदेमंद तो हो सकता है, लेकिन यह चुनौतीपूर्ण भी है। सबसे बड़ा रिस्क 'मैनेजमेंट बैंडविड्थ' का है। कहीं नए बिजनेस पर ध्यान देने के चक्कर में कोर रिफाइनिंग और मार्केटिंग बिजनेस प्रभावित न हो जाए। इसके अलावा, ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक (Geopolitical) तनाव कंपनी के मुनाफे पर असर डालना जारी रख सकते हैं।
