ग्लोबल मार्केट में सप्लाई संकट के चलते Indian Oil Corporation जैसी रिफाइनरी कंपनियों का मुनाफा जबरदस्त बढ़ा है। हालांकि, कंपनियां फुल कैपेसिटी पर काम कर रही हैं, लेकिन कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सरकारी नियमों के चलते निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।
भारत की दिग्गज तेल रिफाइनरी कंपनियां इस समय सुनहरे दौर से गुजर रही हैं। ग्लोबल एनर्जी मार्केट में सप्लाई की किल्लत का फायदा उठाकर Indian Oil Corporation (IOC), Reliance Industries, Bharat Petroleum (BPCL) और Hindustan Petroleum (HPCL) ने शानदार कमाई की है। IOC ने तो दूसरी तिमाही में ₹21,630 करोड़ का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल की तुलना में 184% ज्यादा है।
कैसे बढ़ा मुनाफा?
कंपनियों की सफलता का सबसे बड़ा मंत्र 'ऑपरेशनल एफिशिएंसी' है। सभी रिफाइनरी 100% से ज्यादा की क्षमता पर काम कर रही हैं। अपनी सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए कंपनियों ने अमेरिका, वेनेजुएला और अफ्रीकी देशों से भी क्रूड ऑयल मंगाना शुरू किया है, जिससे सप्लाई में कोई रुकावट नहीं आई है।
GRM का खेल और मार्जिन्स
तेल कंपनियों की कमाई उनके 'ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन' (GRM) पर टिकी होती है। IOC का GRM ड्यूटी काटने के बाद $18.52 प्रति बैरल रहा है। पश्चिम एशिया और रूस में रिफाइनरी बंद होने से ग्लोबल फ्यूल सप्लाई टाइट है, जिसका सीधा फायदा भारतीय कंपनियों को हो रहा है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
निवेशकों को यह समझना होगा कि इस मुनाफे का एक हिस्सा 'इन्वेंट्री गेन्स' से आया है। अगर क्रूड की कीमतें अचानक गिरीं, तो यह फायदा नुकसान में बदल सकता है। इसके अलावा, सरकारी रेगुलेशन के कारण पेट्रोल-डीजल की कीमतें सीमित रहती हैं, जिससे मार्केटिंग मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है। साथ ही, रूसी क्रूड पर मिलने वाला डिस्काउंट कम होना और बढ़ता फ्रेट खर्च कंपनी के खर्चों को बढ़ा सकता है। फिलहाल, नजरें IOC के उन प्रोजेक्ट्स पर हैं जो क्षमता विस्तार के लिए चल रहे हैं।
