मार्जिन में उछाल, मुनाफे का रिकॉर्ड
IOC ने फाइनेंशियल ईयर 2026 को रिकॉर्ड तोड़ नतीजों के साथ खत्म किया है। कंपनी ने ₹36,802 करोड़ का स्टैंडअलोन प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) कमाया, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर 2025 के ₹12,962 करोड़ की तुलना में 184% ज़्यादा है। सेल्स 5% बढ़कर ₹8.86 लाख करोड़ तक पहुंच गई, लेकिन असली कमाल ऑपरेटिंग मार्जिन में हुआ। यह 2.11% से दोगुना से भी ज़्यादा होकर 5.84% पर पहुंच गया। इसी तरह, नेट प्रॉफिट मार्जिन भी 1.53% से बढ़कर 4.15% हो गया। यह लागत में कमी या बेहतर प्राइसिंग पावर का नतीजा है। फाइनेंशियल ईयर की आखिरी तिमाही (Q4 FY26) में भी कंपनी का PAT 56.6% बढ़कर ₹11,377.51 करोड़ रहा, जो लगातार मजबूत प्रदर्शन को दिखाता है।
ऑपरेशनल मोर्चे पर भी दमदार प्रदर्शन
IOC का ऑपरेशनल प्रदर्शन पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 में शानदार रहा। कंपनी की रिफाइनरियों ने रिकॉर्ड 75.4 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) क्रूड ऑयल को प्रोसेस किया, जिसमें 99.5% की विश्वसनीयता बनी रही। पाइपलाइन से प्रोडक्ट की आवाजाही भी 105.3 MMT के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची। कुल पेट्रोलियम प्रोडक्ट की बिक्री 104.4 MMT रही, जो पिछले साल से करीब 4% ज़्यादा है। डोमेस्टिक पेट्रोलियम सेल्स 4.8% बढ़ी, जबकि इंडस्ट्री ग्रोथ 4.3% रही। लुब्रिकेंट सेगमेंट में रिकॉर्ड 855 हजार मीट्रिक टन (TMT) की बिक्री हुई, जो इंडस्ट्री की ग्रोथ से कहीं ज़्यादा है। पेट्रोकेमिकल्स ने भी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 3.22 MMT की बिक्री दर्ज की।
शेयरधारकों को मिला तोहफा
डायवर्सिफाइड बिजनेस के चलते कंपनी की हर स्ट्रीम ने मजबूत नतीजों में योगदान दिया। लुब्रिकेंट्स और पेट्रोकेमिकल्स में रिकॉर्ड बिक्री के अलावा, IOC ने 909 नए रिटेल आउटलेट खोले। इस शानदार परफॉरमेंस को देखते हुए बोर्ड ने ₹1.25 प्रति इक्विटी शेयर के फाइनल डिविडेंड की सिफारिश की है, जो शेयरधारकों को रिटर्न देने के लिए एक अहम कदम है।
मजबूत बैलेंस शीट: कर्ज में भारी कटौती
मुनाफे में ज़बरदस्त बढ़ोतरी के साथ-साथ IOC ने अपने बैलेंस शीट को भी मजबूत किया है। कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2026 के दौरान अपने कुल कर्ज को ₹23,798 करोड़ तक कम कर दिया है। इससे कुल डेट ₹1.34 लाख करोड़ से घटकर ₹1.10 लाख करोड़ पर आ गया है। यह कदम कंपनी को बाज़ार की अस्थिरता से निपटने और वित्तीय मजबूती प्रदान करने में मदद करेगा।
भविष्य की राह में भू-राजनीतिक और महंगाई के तूफान
हालांकि IOC के FY26 के नतीजे मध्य पूर्व के बढ़ते संकट से ज़्यादा प्रभावित नहीं हुए, लेकिन मौजूदा भू-राजनीतिक हालात भविष्य के लिए एक बड़ा जोखिम पैदा कर रहे हैं। इस संघर्ष ने एनर्जी मार्केट को हिला दिया है, जिससे FY27 में क्रूड ऑयल की कीमतें $90-95 प्रति बैरल तक जा सकती हैं। अगर FY27 में क्रूड की कीमतें $120 प्रति बैरल रहीं तो भारत की GDP ग्रोथ घटकर 6% के आसपास आ सकती है। अप्रैल 2026 में 8.3% रही थोक महंगाई और FY27 की दूसरी छमाही में 6-7% रह सकने वाली खुदरा महंगाई, मंदी (stagflation) के खतरे की ओर इशारा कर रही हैं। ऊंचे तेल दामों के कारण करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) FY27 में बढ़कर GDP का 2.3% हो सकता है, और रुपया भी काफी कमजोर हुआ है। इसके अलावा, 31 मार्च 2026 तक डोमेस्टिक LPG की बिक्री पर कंपनी को ₹23,101.56 करोड़ का घाटा हो चुका है, जो वैश्विक कीमतों के बढ़ने से और बढ़ सकता है।
वैल्यूएशन और आगे की राह
फिलहाल, IOC लगभग 5.09 से 8.54 के P/E रेश्यो पर ट्रेड कर रहा है, जो इसके प्रतिस्पर्धियों Bharat Petroleum (BPCL) और Hindustan Petroleum (HPCL) के मुकाबले काफी कॉम्पिटिटिव है। IOC का मार्केट कैप करीब ₹1.85-1.98 लाख करोड़ है, जो इसे एनर्जी सेक्टर में एक बड़ा प्लेयर बनाता है। शेयर की कीमतों में हालिया गिरावट के बावजूद, जहां यह ₹130-₹145 के आसपास कारोबार कर रहा है, एनालिस्ट्स इसे लेकर आम तौर पर पॉजिटिव हैं और इसका टारगेट प्राइस ₹160-175 के बीच बता रहे हैं।
जानकारों की चिंताएं (Bear Case)
रिकॉर्ड मुनाफे के बावजूद, कुछ जानकारों का मानना है कि वर्तमान मार्जिन लेवल टिकाऊ नहीं हैं। ऑपरेटिंग मार्जिन का लगभग तीन गुना बढ़ना एक असाधारण स्थिति है, जो कच्चे माल की खरीद के समय से जुड़ा है। अगर वैश्विक क्रूड कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो IOC को फिर से डोमेस्टिक फ्यूल बिक्री पर घाटा झेलना पड़ सकता है। कंपनी की 88.7% तक इंपोर्टेड क्रूड पर निर्भरता इसे प्राइस शॉक और सप्लाई में रुकावटों के प्रति संवेदनशील बनाती है। पिछे छह महीनों में शेयर में 22% से ज़्यादा की गिरावट भी निवेशकों की चिंताओं को दर्शाती है।