मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बावजूद, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने साफ कर दिया है कि वह खाड़ी देशों से कच्चे तेल की खरीद जारी रखेगी। कंपनी का कहना है कि उसकी रिफाइनरियों की बनावट और शिपिंग लागत को देखते हुए यह सबसे बेहतर विकल्प है।
रिफाइनरी दक्षता और लागत लाभ
कंपनी के चेयरमैन ए. एस. साहनी ने बताया कि इंडियन ऑयल की रिफाइनरियां विशेष प्रकार के कच्चे तेल के लिए डिज़ाइन की गई हैं, जो खाड़ी देशों से ही मिलता है। इसके अलावा, इन देशों से तेल लाने की शिपिंग लागत भी काफी कम है। यही कारण है कि क्षेत्रीय अस्थिरता के बावजूद IOC अपनी वर्तमान खरीद रणनीति पर कायम रहेगी।
आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती
इंडियन ऑयल ने निवेशकों को आश्वस्त किया है कि कच्चे तेल की आपूर्ति में तत्काल किसी रुकावट की उम्मीद नहीं है। कंपनी के पास सितंबर महीने तक के लिए पर्याप्त कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) का भंडार है। हालांकि, रेड सी में बढ़ते संकट को देखते हुए, कंपनी ने आपातकालीन योजनाएं भी तैयार कर ली हैं। यदि आवश्यक हुआ तो सऊदी क्रूड की शिपमेंट को केप ऑफ गुड होप के रास्ते से भी मंगवाया जा सकता है।
नए कॉन्ट्रैक्ट्स पर एहतियात
वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में अनिश्चितता को देखते हुए, इंडियन ऑयल ने फिलहाल नए लॉन्ग-टर्म (दीर्घकालिक) तेल और गैस सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट्स पर हस्ताक्षर करने से परहेज करने का फैसला किया है। कंपनी का मानना है कि जब तक कीमतें और सप्लाई स्थिर नहीं होतीं, तब तक नए कॉन्ट्रैक्ट्स करना फायदे का सौदा नहीं होगा। इसके बजाय, IOC अपनी लॉजिस्टिक्स (परिवहन) क्षमता को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इसमें दो बड़े गैस कैरियर (जहाज) खरीदने की योजना भी शामिल है, ताकि लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) के आयात को स्वतंत्र रूप से प्रबंधित किया जा सके।
निवेशकों के लिए ध्यान देने योग्य बातें
निवेशकों को कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन पर नजर रखनी होगी, खासकर अगर केप ऑफ गुड होप के रास्ते शिपिंग बढ़ने से माल ढुलाई की लागत बढ़ती है। कंपनी के पास फिलहाल पर्याप्त भंडार है, लेकिन अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो बीमा और शिपिंग प्रीमियम बढ़ सकते हैं, जिससे आयात लागत पर असर पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त, गैस कैरियर में कंपनी का निवेश सप्लाई चेन को सुरक्षित करने की एक दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है।
