क्यों डूबी कंपनियों की नैया?
विश्लेषक फर्म Nomura की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियों द्वारा पेट्रोल और डीजल के दाम में ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी भी बढ़ते नुकसान की भरपाई के लिए नाकाफी साबित हुई है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, खासकर हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास की घटनाओं ने कच्चे तेल की लागत को काफी बढ़ा दिया है।?
Nomura का अनुमान है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को अपने ओवरऑल फ्यूल प्रॉफिट मार्जिन को बराबर (break-even) लाने के लिए ₹25 प्रति लीटर की अतिरिक्त बढ़ोतरी की जरूरत होगी। लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) की लागत भी लगभग दोगुनी होकर $1,000 प्रति टन तक पहुंच गई है, जो पहले $520 प्रति टन थी। फर्म का अनुमान है कि सभी OMCs को LPG पर रोजाना करीब ₹440 करोड़ का नुकसान हो रहा है।
बिजनेस मॉडल का अलग-अलग असर
Nomura ने अलग-अलग कंपनियों के लिए अलग-अलग रेटिंग दी हैं, जो उनके बिजनेस मॉडल के अंतर को दर्शाती हैं।
- Indian Oil Corporation (IOCL): कंपनी की मार्केट कैप करीब ₹1.9 ट्रिलियन और P/E रेश्यो लगभग 5.17 है। IOCL को सबसे मजबूत स्थिति में माना जा रहा है क्योंकि यह रिफाइनिंग पर ज्यादा निर्भर करती है और फ्यूल बेचने से होने वाले प्रॉफिट पर इसकी निर्भरता कम है। जेट फ्यूल से होने वाला मजबूत प्रॉफिट और आगामी रिफाइनरी विस्तार इसे वर्तमान दबाव से बचा रहे हैं। Nomura ने इसे 'Buy' रेटिंग दी है।
- Bharat Petroleum Corporation (BPCL): इसकी वैल्यूएशन लगभग ₹1.2 ट्रिलियन और P/E रेश्यो करीब 4.83 है। BPCL को भी 'Buy' रेटिंग मिली है, जिसका फायदा इसे HPCL की तुलना में फ्यूल सेल्स पर कम निर्भरता के कारण मिल रहा है।
- Hindustan Petroleum Corporation (HPCL): मार्केट कैप करीब ₹77,000 करोड़ और P/E रेश्यो लगभग 4.22 है। HPCL को 'Neutral' रेटिंग मिली है क्योंकि यह फ्यूल मार्केटिंग ऑपरेशंस पर काफी अधिक निर्भर है। Nomura की चेतावनी है कि HPCL को प्रति बैरल $19 का जो नुकसान हो रहा है, वह इसके फाइनेंशियल रिजर्व को दो साल के भीतर खत्म कर सकता है। IOCL के विपरीत, HPCL के पास लगभग 22,000 रिटेल आउटलेट हैं, जबकि IOCL के 34,000 से भी ज्यादा आउटलेट हैं।
सरकारी कदम, पर ऊंट के मुंह में जीरा
सरकार द्वारा ₹3 प्रति लीटर की फ्यूल प्राइस हाइक एक कदम है, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि यह पर्याप्त नहीं है। 2025 में, एनर्जी कॉस्ट के लिए सरकारी सहायता का अनुमान INR 4.3 लाख करोड़ (USD 51 बिलियन) था। डीजल पर एक्सपोर्ट टैक्स की वापसी कुछ राहत दे सकती है, लेकिन इसका असर सीमित है।
लंबे समय की चुनौतियाँ: जियोपॉलिटिक्स और पॉलिसी
कम P/E रेश्यो के बावजूद, इंडियन OMC सेक्टर को लंबी अवधि की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। जियोपॉलिटिकल टेंशन, खासकर हॉर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण शिपिंग रूट पर, कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव ला रही है। यह अस्थिरता OMC के नुकसान को बढ़ा रही है। इसके अलावा, सरकारी मूल्य निर्धारण और सब्सिडी पर ऐतिहासिक निर्भरता, जो उपभोक्ताओं के लिए मददगार रही है, सरकारी खजाने पर दबाव डालती है।
एनालिस्ट्स की राय और सेक्टर का आउटलुक
Nomura ने IOCL के लिए ₹190 ( 36% का पोटेंशियल अपसाइड) और BPCL के लिए ₹460 ( 56% का पोटेंशियल अपसाइड) का टारगेट प्राइस दिया है। HPCL के लिए टारगेट ₹440 ( 16% का पोटेंशियल अपसाइड) रखा गया है। भारत की एनर्जी डिमांड बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन OMCs का तत्काल भविष्य कच्चे तेल की कीमतों और सरकारी नीतियों पर निर्भर करेगा।