ब्रोकरेज का बड़ा अनुमान
Morgan Stanley ने HPCL, BPCL और IOCL जैसी भारतीय ऊर्जा कंपनियों के लिए अपनी 'Overweight' रेटिंग को दोहराया है। ब्रोकरेज फर्म का अनुमान है कि घरेलू क्रूड ऑयल के मजबूत स्टॉक और हाल ही में ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी में की गई कटौती के समर्थन से OMC का रिफाइनिंग मार्जिन $3-4 प्रति बैरल तक सुधर सकता है। इसी के चलते, शुक्रवार को Hindustan Petroleum Corporation (HPCL) (P/E 12x, मार्केट कैप ~$10 अरब) का शेयर 0.5% बढ़कर कारोबार कर रहा था, जो कि अच्छी वॉल्यूम के साथ था। वहीं, Bharat Petroleum Corporation (BPCL) (P/E ~10x, मार्केट कैप ~$8 अरब) का शेयर 0.2% गिर गया, जबकि Indian Oil Corporation (IOCL) (P/E 9x, मार्केट कैप >$12 अरब) का शेयर कम वॉल्यूम पर फ्लैट रहा। शेयरों में यह मिली-जुली प्रतिक्रिया निवेशकों के अलग-अलग नजरिए को दिखाती है।
टैक्स कटौती का कितना असर?
सरकार द्वारा पेट्रोल-डीजल पर ₹10 प्रति लीटर (लगभग $20 प्रति बैरल) की एक्साइज ड्यूटी में कटौती से फ्यूल रिटेलर्स और रिफाइनर्स को सीधा फायदा होगा। माना जा रहा है कि इस टैक्स राहत से OMC का मासिक घाटा जो पहले $1.5 अरब था, वह घटकर $1.2 अरब रह सकता है। इस तरह के सरकारी सपोर्ट से वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव कम होने पर कंपनियों के वैल्यूएशन (Valuation) में भी सुधार हो सकता है।
रिलायंस और निर्यात कर का मामला
Morgan Stanley ने भारत की क्रूड बास्केट प्राइस का अनुमान बढ़ाकर $75 प्रति बैरल कर दिया है, जो वैश्विक ऊर्जा बाजारों में स्थिरता की उम्मीद जगाता है। विंडफॉल टैक्स (Windfall Tax) का खतरा कम हुआ है, खासकर Reliance Industries जैसी इंटीग्रेटेड रिफाइनर्स के लिए, जिनका P/E ~25x है। हालांकि, डीजल और जेट फ्यूल पर $37-50 प्रति बैरल के निर्यात कर (Export Tax) से Reliance के मार्जिन में $1.5-2 प्रति बैरल की कमी आ सकती है। यह राज्य-संचालित OMCs से अलग है, जो घरेलू बाजार पर अधिक केंद्रित हैं और इन निर्यात करों से कम प्रभावित होती हैं।
मार्च 2025 में इसी तरह के टैक्स एडजस्टमेंट से OMCs के शेयरों में अस्थायी उछाल आया था, लेकिन निर्यात करों के बने रहने के कारण बाद में उनमें गिरावट आई थी। यह पैटर्न दिखाता है कि बाजार इन खबरों पर सावधानी से प्रतिक्रिया करता है। वर्तमान में, रिफाइनरी यूटिलाइजेशन रेट 100% से ज़्यादा है और क्रूड इन्वेंट्री 41 दिनों से ज़्यादा का कवर प्रदान करती है, जो एक मजबूत सप्लाई चेन का संकेत है। ONGC (P/E ~8x) और Oil India (P/E ~7x) जैसे कंपनियों के बिजनेस मॉडल अलग हैं, लेकिन OMCs पर सीधे रिटेल मार्केट का दबाव ज़्यादा है।
हालांकि मार्जिन में सुधार की उम्मीद है, डीजल और जेट फ्यूल पर जारी निर्यात कर Reliance Industries जैसी कंपनियों के लिए चुनौती बने हुए हैं। यह घरेलू बाजार पर केंद्रित कंपनियों और निर्यात व्यवसाय वाली कंपनियों के बीच एक बड़ा अंतर दर्शाता है। OMCs को मासिक $1.2 अरब के घाटे में कमी की उम्मीद है, लेकिन यह पिछले $1.5 अरब के घाटे से एक आंशिक रिकवरी है। इसलिए, यदि मांग कमजोर पड़ती है या भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ते हैं, तो सेक्टर अभी भी वित्तीय दबाव का सामना कर सकता है। पेट्रोल पंप डीलरों के लिए क्रेडिट टर्म्स (Credit Terms) को एक से तीन दिनों तक बढ़ाना कुछ वर्किंग कैपिटल राहत देता है, लेकिन यह लाभप्रदता की गहरी समस्याओं का समाधान नहीं करता।
ब्रोकरेज फर्म Morgan Stanley के $75 प्रति बैरल के क्रूड बास्केट प्राइस के अनुमान से वैश्विक ऊर्जा बाजारों में स्थिरता की उम्मीद है। सेक्टर की वैल्यूएशन में सकारात्मक हलचल तब देखने को मिल सकती है जब वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव कम हो। वर्तमान ऑपरेशनल डेटा मजबूत सप्लाई चेन का संकेत देता है, जो घरेलू मांग को पूरा करने के लिए तैयार है, जिससे वित्तीय नतीजों के प्रति सतर्कतापूर्ण आशावाद बना हुआ है।