सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) के लिए बड़ी चुनौती सामने आई है। दिसंबर 2026 तक एलपीजी (LPG) पर अंडर-रिकवरी बढ़कर ₹370 प्रति सिलेंडर तक पहुंचने का अनुमान है। सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (Saudi Contract Prices) में उछाल के चलते IOCL, BPCL और HPCL के मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है।
सरकारी तेल कंपनियों यानी OMCs पर एलपीजी सिलेंडर की बिक्री से होने वाला नुकसान लगातार बढ़ रहा है। आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2026 तक एक 14.2 किलो के घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर अंडर-रिकवरी (वास्तविक लागत और बिक्री मूल्य का अंतर) बढ़कर करीब ₹370 तक पहुंचने का अनुमान है। यह स्थिति पिछले कुछ महीनों से चिंताजनक बनी हुई है, जहां अंडर-रिकवरी सितंबर में ₹184, अक्टूबर में ₹229 और नवंबर 2026 में ₹309 रही थी।
नुकसान की बड़ी वजह
इस बढ़ते वित्तीय बोझ का मुख्य कारण 'सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस' में आई तेजी है, जो अब $756 प्रति टन के स्तर पर पहुंच गई है। चूंकि ये कंपनियां देश के 33 करोड़ से ज्यादा घरों को सब्सिडाइज्ड दरों पर ईंधन मुहैया कराती हैं, इसलिए वैश्विक स्तर पर कीमतों में मामूली बदलाव भी इनके ऑपरेशनल कॉस्ट को सीधे प्रभावित करता है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 30 सितंबर, 2026 तक IOCL की संचयी अंडर-रिकवरी ₹32,505.69 करोड़, BPCL की ₹17,334.40 करोड़ और HPCL की ₹18,048.82 करोड़ दर्ज की गई थी।
मुनाफे पर क्या होगा असर?
हालांकि, चालू फाइनेंशियल ईयर 2027 की दूसरी तिमाही में इन कंपनियों ने शानदार नतीजे पेश किए थे—जिसमें IOCL का नेट प्रॉफिट ₹22,503 करोड़ रहा—लेकिन यह परफॉर्मेंस जून के मध्य से अगस्त के बीच क्रूड ऑयल की कीमतों में आई अस्थायी गिरावट का परिणाम थी।
निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ये कंपनियां इस दबाव को झेल पाएंगी? यदि ग्लोबल फ्यूल प्राइसेज में अस्थिरता बनी रहती है, तो इन कंपनियों के लिए मार्केटिंग मार्जिन को सुरक्षित रखना कठिन हो सकता है। साथ ही, इन्वेंट्री लॉस का जोखिम भी बैलेंस शीट पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। बाजार की नजर अब आने वाली तिमाही नतीजों पर है कि क्या कंपनियां इन बढ़ती लागतों के बीच अपना मुनाफा बरकरार रख पाएंगी या नहीं।
