सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) के लिए वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही बेहतर रहने की उम्मीद है। पेट्रोल और डीजल पर मार्जिन बढ़कर **₹11.4** प्रति लीटर तक पहुंचने का अनुमान है, हालांकि **₹11,000 करोड़** का LPG घाटा मुनाफे की रफ्तार को धीमा कर सकता है।
मुनाफे की नई उम्मीद
Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum, और Hindustan Petroleum जैसी सरकारी कंपनियों के लिए दूसरी तिमाही में फ्यूल प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार दिख रहा है। पिछले तिमाही के निचले स्तर ₹2.4 प्रति लीटर के मुकाबले, अब मार्जिन ₹11.4 प्रति लीटर तक जाने की संभावना है। इसकी मुख्य वजह ग्लोबल सप्लाई चेन में कसावट और रिफाइनरी आउटपुट में आई कमी है।
LPG का बोझ और असर
भले ही पेट्रोल-डीजल से मुनाफा बढ़ रहा हो, लेकिन LPG की बिक्री से होने वाला नुकसान कंपनी की बैलेंस शीट पर भारी पड़ रहा है। इस तिमाही में कंपनियों को लगभग ₹11,000 करोड़ का घाटा सहना पड़ सकता है। हालांकि यह पहली तिमाही के ₹21,200 करोड़ के नुकसान से कम है, लेकिन यह नेट मार्जिन को घटाकर ₹8.5 प्रति लीटर पर ले आता है।
ग्लोबल मार्केट की चुनौतियां
दुनिया भर में रिफाइनरी आउटपुट में 4 से 5 मिलियन बैरल प्रतिदिन की गिरावट ने डीजल की कीमतों को सहारा दिया है। सिंगापुर रिफाइनिंग बेंचमार्क $20.5 प्रति बैरल पर बना हुआ है, जबकि डीजल मार्जिन $61.7 प्रति बैरल के आसपास है।
निवेशकों के लिए अहम संकेत
इन कंपनियों का मुनाफा सीधे तौर पर कच्चे तेल की कीमतों से जुड़ा है। जानकारों का मानना है कि मौजूदा टैक्स स्ट्रक्चर में सामान्य मार्जिन के लिए ब्रेंट क्रूड का $95 प्रति बैरल पर होना जरूरी है। वहीं, अगर सरकार एक्साइज ड्यूटी में बदलाव करती है, तो यह ब्रेक-ईवन लेवल घटकर $65 प्रति बैरल तक आ सकता है। इसके अलावा, डॉलर के मुकाबले रुपया की चाल और ट्रांसपोर्ट कॉस्ट भी आने वाले समय में कंपनियों के नतीजों को प्रभावित करेंगे।
