Brent Crude Price: कच्चा तेल **$100** के पार, फ्यूल रिटेलर्स पर भारी संकट; पेट्रोल-डीजल पर बढ़े नुकसान

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AuthorMehul Desai|Published at:
Brent Crude Price: कच्चा तेल **$100** के पार, फ्यूल रिटेलर्स पर भारी संकट; पेट्रोल-डीजल पर बढ़े नुकसान

Brent crude के भाव **$100** प्रति बैरल के ऊपर निकल गए हैं, जिससे सरकारी तेल कंपनियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मई से पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रहने के कारण कंपनियां अब प्रति लीटर पेट्रोल पर **₹5** और डीजल पर **₹23** का नुकसान उठा रही हैं।

मुनाफे पर क्यों मंडरा रहा है खतरा?

9 सितंबर, 2026 को ब्रेंट क्रूड ऑयल $100 के स्तर को पार कर गया है। जुलाई 2026 के बाद यह पहली बार है जब कीमतें इस स्तर पर पहुंची हैं। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी दिग्गज कंपनियां ग्लोबल मार्केट रेट पर कच्चा तेल खरीद रही हैं, लेकिन 25 मई, 2026 से रिटेल कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इस कारण कंपनियों के मार्केटिंग मार्जिन निगेटिव हो गए हैं।

क्यों बढ़ रही है ग्लोबल टेंशन?

कीमतों में इस उछाल के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) में सप्लाई रुकने का डर है। इसके अलावा, OPEC+ द्वारा उत्पादन स्तर को स्थिर रखने के फैसले ने आग में घी का काम किया है। भारत अपनी तेल जरूरतों का 88% से अधिक आयात करता है। अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच भारत का तेल आयात बिल 56.5% बढ़कर $63.4 बिलियन तक पहुंच गया है, जिससे रुपया कमजोर हो रहा है और ट्रेड डेफिसिट भी चौड़ा हो रहा है।

अर्थव्यवस्था पर असर और मार्केट की प्रतिक्रिया

बढ़ती ईंधन लागत का सीधा असर लॉजिस्टिक्स खर्च पर पड़ता है, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। इस कारण भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है। इसी डर से 9 सितंबर को Nifty 50 और BSE Sensex तीन महीने के निचले स्तर पर लुढ़क गए। निवेशकों की नजरें अब इस पर टिकी हैं कि क्या सरकार उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में कटौती करेगी या ईंधन की कीमतों में इजाफा होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.