Solar India Deadline: सरकार का बड़ा फैसला! जून 2026 की डेडलाइन पर नहीं मिलेगी छूट

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AuthorAditya Rao|Published at:
Solar India Deadline: सरकार का बड़ा फैसला! जून 2026 की डेडलाइन पर नहीं मिलेगी छूट
Overview

भारत के मिनिस्ट्री ऑफ न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी (MNRE) ने ALMM-II सोलर सेल कंप्लायंस के लिए **1 जून 2026** की डेडलाइन को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया है। हालांकि, जो डेवलपर्स खास प्रगति दिखाएंगे, उन्हें **2 से 4 महीने** की केस-बाय-केस छूट दी जाएगी।

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डेडलाइन पर सरकार का कड़ा रुख

मिनिस्ट्री ऑफ न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी (MNRE) ने अप्रूव्ड लिस्ट ऑफ मॉडल्स एंड मैन्युफैक्चरर्स (ALMM) लिस्ट-II कंप्लायंस की डेडलाइन को बढ़ाने का कोई भी बड़ा फैसला नहीं लिया है। यानी, 1 जून 2026 की डेडलाइन पर ही सख्ती से अमल किया जाएगा। यह फैसला सरकार के घरेलू सोलर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और इंपोर्ट पर निर्भरता कम करने के अपने कमिटमेंट को दिखाता है।

डेवलपर्स को मिलेगी खास राहत

दुनियाभर में सप्लाई चेन की अस्थिरता और भू-राजनीतिक असर को ध्यान में रखते हुए, मिनिस्ट्री कुछ चुनिंदा मामलों में 2 से 4 महीने तक की मोहलत देगी। इसके लिए डेवलपर्स को प्रोजेक्ट के अहम पड़ावों, जैसे जमीन अधिग्रहण या फाइनेंशियल क्लोजर, पर हुई प्रगति को साबित करना होगा। राहत के लिए आवेदन 30 जून 2026 तक नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर एनर्जी के पोर्टल पर जमा करने होंगे और एक एक्सपर्ट कमेटी इनकी समीक्षा करेगी।

इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरर्स के लिए अच्छी खबर

इस पॉलिसी का सीधा फायदा अडानी सोलर, टाटा पावर और वारी एनर्जी जैसे बड़े इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरर्स को होने की उम्मीद है, जिन्होंने घरेलू सेल प्रोडक्शन में बड़ा निवेश किया है। जब मार्केट घरेलू कंटेंट की ओर बढ़ रहा है, तो इन कंपनियों को एक कॉम्पिटिटिव एज मिलेगा। वहीं, छोटी फर्म्स और प्रोजेक्ट डेवलपर्स को हाई-एफिशिएंसी सेल्स जैसे TOPCon की घरेलू क्षमता सीमित होने के कारण चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, जिससे कमर्शियल और इंडस्ट्रियल क्लाइंट्स के लिए लागत बढ़ सकती है।

प्रोजेक्ट्स पर खतरा और संभावित देरी

जिन डेवलपर्स का मार्जिन पहले से टाइट है, उन्हें अप्रूव्ड डोमेस्टिक मॉड्यूल्स के लिए सप्लाई-डिमांड गैप के कारण लागत बढ़ने का खतरा है। अगर घरेलू मैन्युफैक्चरर्स प्रोडक्शन टारगेट को पूरा नहीं कर पाते हैं, तो कमीशनिंग में देरी, पेनल्टी और रेवेन्यू लॉस जैसी समस्याएं आ सकती हैं। राहत के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया में ब्यूरोक्रेटिक देरी का जोखिम भी है, जो प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग और टाइमलाइन को प्रभावित कर सकता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.