Coal Mandate: पावर क्राइसिस टालने के लिए सरकार का नया प्लान, थर्मल पावर प्लांट्स के लिए **5%** इम्पोर्टेड कोल हुआ अनिवार्य

ENERGY
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
Coal Mandate: पावर क्राइसिस टालने के लिए सरकार का नया प्लान, थर्मल पावर प्लांट्स के लिए **5%** इम्पोर्टेड कोल हुआ अनिवार्य

देश में घटते कोयले के स्टॉक और बढ़ती बिजली की मांग को देखते हुए सरकार अब थर्मल पावर प्लांट्स के लिए **5%** इम्पोर्टेड कोल का मिश्रण अनिवार्य करने पर विचार कर रही है, जिससे पावर कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है।

भारत के पावर प्लांट्स में कोयले का संकट गहराता जा रहा है। सितंबर तिमाही में कोयले का इन्वेंट्री स्टॉक करीब 49% तक गिर गया है, जो पिछले साल इसी दौरान 26% की गिरावट थी। हालात ये हैं कि देश के लगभग 40% कोयला आधारित प्लांटों के पास 3 दिन से भी कम का फ्यूल स्टॉक बचा है।\n\n### आखिर क्यों आई ये नौबत?\n\nइस संकट के पीछे कई कारण एक साथ मिल गए हैं। कमजोर मानसून की वजह से हाइड्रोपावर जनरेशन कम हुआ है, जिससे सारा दबाव कोयला आधारित प्लांट्स पर आ गया है। वहीं, पूर्वी भारत की खदानों में भारी बारिश से माइनिंग प्रभावित हुई है और रेल इंफ्रास्ट्रक्चर की दिक्कतें कोयले की सप्लाई में बाधा बन रही हैं। हालांकि, रिन्यूएबल एनर्जी में 21% की सालाना बढ़ोतरी हुई है, लेकिन फिलहाल यह चौबीसों घंटे की मांग पूरी करने के लिए नाकाफी है।\n\n### निवेशकों के लिए जोखिम (Investor Alert)\n\nमई के बाद से ग्लोबल मार्केट में कोयले की कीमतें डबल डिजिट में बढ़ी हैं। यदि सरकार का यह मैंडेट लागू होता है, तो पावर कंपनियों की फ्यूल कॉस्ट सीधे तौर पर बढ़ जाएगी। सबसे ज्यादा रिस्क कर्ज में डूबी स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों (DISCOMs) के लिए है। अगर ये कंपनियां बढ़ती लागत को टैरिफ के जरिए ग्राहकों पर नहीं डाल पाती हैं, तो उनका फाइनेंशियल हेल्थ और खराब हो सकता है।\n\nइस समय स्पॉट पावर की कीमतें ₹7.71 प्रति यूनिट तक पहुंच गई हैं, जो 2022 के बाद का उच्चतम स्तर है। अब बाजार की नजरें सरकार के आधिकारिक नोटिफिकेशन पर हैं कि क्या वो इस बढ़ती लागत की भरपाई के लिए कोई राहत मैकेनिज्म लाएगी या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.