India और Uzbekistan ने अपने कूटनीतिक रिश्तों को 'कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' में अपग्रेड कर लिया है। इस नए समझौते के तहत भारत को Uranium की लंबी अवधि की सप्लाई मिलेगी, जिससे न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर को बड़ी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
न्यूक्लियर पावर की राह होगी आसान
प्रधानमंत्री Narendra Modi की ताशकंद यात्रा के दौरान, दोनों देशों ने औपचारिक रूप से एक नई साझेदारी का ऐलान किया है। इस समझौते का मुख्य केंद्र भारत के सिविल न्यूक्लियर एनर्जी प्रोग्राम के लिए Uranium की निरंतर सप्लाई सुनिश्चित करना है। यह भारत की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत देश अपने न्यूक्लियर फ्यूल चेन को डाइवर्सिफाई कर रहा है ताकि ग्लोबल मार्केट में होने वाली उठा-पटक से बचा जा सके।
ट्रेड टारगेट और नई नीतियां
सिर्फ एनर्जी ही नहीं, बल्कि दोनों देशों ने आर्थिक रिश्तों को भी नई रफ्तार देने का फैसला किया है। अब एक 'कोऑर्डिनेशन काउंसिल' का गठन किया जाएगा, जिसकी कमान दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के हाथ में होगी।
- ट्रेड टारगेट: साल 2025 में द्विपक्षीय व्यापार $1.3 बिलियन के पार पहुंच गया था, जिसे अब बढ़ाकर $2 बिलियन तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
- आसान बिजनेस: जॉइंट कमीशन को अब मिनिस्ट्रियल लेवल पर अपग्रेड किया जा रहा है, ताकि प्राइवेट सेक्टर के साथ बिजनेस करने में आने वाली नौकरशाही की बाधाओं को खत्म किया जा सके।
इनवेस्टर्स के लिए क्या है खास?
हालांकि यह समझौता रणनीतिक रूप से काफी अहम है, लेकिन एनर्जी सेक्टर के जानकारों का मानना है कि मध्य एशिया से मटेरियल की ट्रांसपोर्टिंग और लॉजिस्टिक्स एक चुनौती हो सकती है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नया फ्रेमवर्क कितनी तेजी से ग्राउंड लेवल पर सप्लाई लाइन में बदलता है।
