Samudra Manthan Scheme: भारत का ₹84,084 करोड़ का बड़ा दांव! ONGC और OIL को मिलेगा सब्सिडी का फायदा

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Samudra Manthan Scheme: भारत का ₹84,084 करोड़ का बड़ा दांव! ONGC और OIL को मिलेगा सब्सिडी का फायदा

भारत सरकार ने देश की तेल और गैस खोज को बढ़ावा देने के लिए ₹84,084 करोड़ की 'समुद्र मंथन' योजना लॉन्च की है। ONGC और OIL जैसी सरकारी कंपनियों को गहरे पानी में ड्रिलिंग की लागत पर 50% तक की सब्सिडी मिलेगी, जिससे आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।

'समुद्र मंथन' क्या है और क्यों?

'समुद्र मंथन' राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना (National Offshore Exploration Scheme) के तहत भारत सरकार ने यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसका मुख्य उद्देश्य देश में तेल और गैस के उत्पादन को फिर से शुरू करना है। अभी भारत अपनी हाइड्रोकार्बन ज़रूरतों का लगभग 90% आयात करता है। इस योजना के ज़रिए सरकार गहरे और अति-गहरे पानी वाले अनछुए क्षेत्रों में नए भंडार खोजने की कोशिश कर रही है। यह योजना फाइनेंशियल ईयर 2030-31 तक चलेगी, जो अपतटीय अन्वेषण के लिए एक लंबी अवधि की रणनीति प्रदान करती है।

सब्सिडी का क्या है गणित?

इस योजना का सबसे अहम हिस्सा सरकार की ओर से मिलने वाली सब्सिडी है, जो गहरे पानी में ड्रिलिंग से जुड़े भारी-भरकम खर्च को कम करने में मदद करेगी। योजना के तहत कुल 60 खोजी कुओं (exploratory wells) के लिए, सरकार ड्रिलिंग लागत का 50% तक देगी, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति कुआं ₹675 करोड़ होगी। इस वित्तीय सहायता का लक्ष्य सरकारी ऊर्जा कंपनियों Oil and Natural Gas Corporation (ONGC) और Oil India Limited (OIL) को उन इलाकों में अन्वेषण बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना है, जहां संभावना तो बहुत है, लेकिन जोखिम भी उतना ही ज्यादा है। इन इलाकों में कृष्णा-गोदावरी (KG), महानदी, कावेरी और अंडमान अपतटीय क्षेत्र शामिल हैं।

निवेशकों के लिए क्या मायने?

निवेशकों के लिए, यह योजना ONGC और OIL के लिए जोखिम-इनाम (risk-reward) के प्रोफाइल को बदल देती है। गहरे पानी में अन्वेषण बेहद महंगा होता है और इसमें विफलता की दरें भी ऐतिहासिक रूप से बहुत अधिक रही हैं। इंडस्ट्री के आंकड़ों के अनुसार, ऐसे कई खोजी कुएं वाणिज्यिक खोजों में तब्दील नहीं हो पाते। सरकार द्वारा ड्रिलिंग लागत का आधा हिस्सा कवर करने से, कंपनियां उन अन्वेषण गतिविधियों को अंजाम दे सकेंगी जो अन्यथा बहुत जोखिम भरी या आर्थिक रूप से संभव नहीं लगतीं। इससे 'ड्राई होल' (यानी, खोदे गए लेकिन तेल नहीं देने वाले कुएं) का वित्तीय बोझ कंपनियों पर कम होगा।

क्या हैं चुनौतियाँ?

हालांकि, इस परियोजना में कई परिचालन (operational) और बाजार संबंधी बाधाएं हैं। भूगर्भीय अनिश्चितताओं के अलावा, कंपनियों को विशेष बुनियादी ढांचे, जैसे ड्रिलशिप्स (drillships) की कमी से भी निपटना होगा, जो गहरे पानी के संचालन के लिए आवश्यक हैं। 'समुद्र मंथन' योजना की सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि ONGC और OIL कितनी जल्दी अपने संयुक्त प्रयासों का समन्वय करते हैं, आवश्यक उपकरण प्राप्त या चार्टर करते हैं, और इन दूरस्थ स्थानों के लिए विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला स्थापित करते हैं। लॉजिस्टिक्स में किसी भी देरी से सरकारी सब्सिडी के बावजूद लागत बढ़ सकती है।

तेल की कीमतों का असर

इसके अलावा, कंपनियों को होने वाला वित्तीय लाभ वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों से जुड़ा रहेगा। सरकारी फंडिंग से शुरुआती पूंजीगत व्यय तो कम हो जाता है, लेकिन किसी भी खोजे गए भंडार की अंतिम लाभप्रदता तेल की मौजूदा बाजार कीमत पर निर्भर करेगी। यदि कीमतें काफी गिरती हैं, तो शुरुआती अन्वेषण सब्सिडी के बावजूद, इन महंगे गहरे पानी के क्षेत्रों को विकसित करने का आर्थिक मामला दबाव में आ सकता है।

निवेशकों को आगामी वर्षों के लिए भूकंपीय डेटा अधिग्रहण (seismic data acquisition) और रिग परिनियोजन (rig deployment) की योजनाओं पर ध्यान देना चाहिए। ONGC के नेतृत्व वाले ड्रिलशिप क्षमता संयुक्त उद्यम (joint venture) की प्रगति भी एक महत्वपूर्ण संकेतक होगी, क्योंकि यह सीधे निष्पादन की गति को प्रभावित करती है। नामित बेसिनों में खोज दर (discovery rates) पर भविष्य के अपडेट यह निर्धारित करने में मदद करेंगे कि 'समुद्र मंथन' योजना सरकारी खर्च को घरेलू तेल और गैस उत्पादन में सार्थक वृद्धि में बदल रही है या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.