सरकार ने पावर सेक्टर के डेटा को सेंट्रलाइज करने के लिए 'National Electricity Data Sharing Framework' लॉन्च किया है। इसका मकसद AI के जरिए ग्रिड की दक्षता बढ़ाना है, लेकिन इसके साथ ही साइबर सुरक्षा और डेटा सेंटर्स की बढ़ती ऊर्जा मांग जैसे जोखिम भी सामने आए हैं।
भारत सरकार ने इस महीने 'National Electricity Data Sharing Framework' की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य पावर सेक्टर के बिखरे हुए डेटा को एक मंच पर लाना है। इस पहल के जरिए बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण की पूरी वैल्यू चेन को एक स्टैंडर्ड डिजिटल ईकोसिस्टम में बदलने की तैयारी है। नेशनल इलेक्ट्रिसिटी डेटा पोर्टल (NEDP) के जरिए स्टार्टअप्स और यूटिलिटी कंपनियों को ग्रिड मैनेजमेंट के लिए जरूरी जानकारी मिलेगी, जिससे AI मॉडल्स तैयार करने में मदद मिलेगी।\n\n### AI से सुधरेगी ग्रिड की परफॉर्मेंस\n\nइस फ्रेमवर्क का मुख्य लक्ष्य आधुनिक तकनीक के जरिए ग्रिड की रिलायबिलिटी (reliability) बढ़ाना है। अब तक सरकारी और प्राइवेट कंपनियों का डेटा अलग-अलग 'साइलो' में रहता था, जिससे नेशनल लेवल पर परफॉर्मेंस का विश्लेषण करना मुश्किल था। अब 'National Electricity Data Governance Committee' इस डेटा को अलग-अलग स्तरों में बांटेगी, ताकि डिमांड फोरकास्टिंग, रिन्यूएबल एनर्जी इंटीग्रेशन और ट्रांसमिशन इक्विपमेंट के प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस को बेहतर बनाया जा सके।\n\n### साइबर सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौती\n\nडिजिटलीकरण के साथ ही अब निवेशकों की नजर साइबर सुरक्षा पर भी है। ग्रिड के डिजिटल होने से साइबर हमलों का खतरा बढ़ गया है। इसे रोकने के लिए सरकार ने स्पष्ट किया है कि वे स्वदेशी AI मॉडल्स के सोर्स कोड पर घरेलू नियंत्रण बनाए रखेंगे। इसके अलावा, AI के बढ़ते इस्तेमाल से डेटा सेंटर्स पर बिजली का लोड भी बढ़ेगा, जो लोकल ग्रिड पर दबाव डाल सकता है। इसे संभालने के लिए सरकार एक अलग डेटा सेंटर पॉलिसी पर भी काम कर रही है।\n\n### निवेशकों के लिए क्या है जरूरी?\n\nनिवेशकों को यह देखना होगा कि राज्य की यूटिलिटीज और प्राइवेट कंपनियां इस वॉलंटरी प्लेटफॉर्म को कितनी तेजी से अपनाती हैं। अगर भागीदारी कम रहती है, तो पोर्टल का वास्तविक लाभ मिलना मुश्किल होगा। आने वाले समय में मुख्य सरकारी और प्राइवेट खिलाड़ियों की भागीदारी और डेटा सेंटर पॉलिसी के दिशा-निर्देश इस सेक्टर की चाल तय करेंगे।
