भारत के पावर मिनिस्टर और अमेरिकी ऊर्जा सचिव ने ह्यूस्टन में मुलाकात की है। चर्चा का मुख्य केंद्र 2047 तक **100 GW** न्यूक्लियर क्षमता हासिल करना है। **2025 SHANTI Act** के बाद अब प्राइवेट कंपनियां भी इस सेक्टर में उतर सकेंगी, जो एक बड़ा स्ट्रक्चरल बदलाव है।
क्या है नई स्ट्रैटेजी?
पावर मिनिस्टर मनोहर लाल ने ह्यूस्टन में अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट के साथ द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देने पर चर्चा की। इस बातचीत में भारत में बढ़ती एआई (AI) और डेटा सेंटर इंडस्ट्री की बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए न्यूक्लियर पावर को 'बेस-लोड' विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है।
प्राइवेट सेक्टर की एंट्री
2025 में लागू हुए SHANTI Act (Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India) ने गेम बदल दिया है। अब तक यह सेक्टर सरकारी कंपनियों तक सीमित था, लेकिन अब प्राइवेट और विदेशी निवेश के दरवाजे खुल चुके हैं। NTPC ने पहले ही 100 GW के लक्ष्य में से 30% योगदान देने का वादा किया है। इसके अलावा, Adani और Jindal Steel जैसी बड़ी कंपनियां भी साइट सिलेक्शन और प्रोजेक्ट डेवलपमेंट की संभावना तलाश रही हैं।
निवेशकों के लिए चुनौतियां
लंबी अवधि के नजरिए से यह सेक्टर आकर्षक है, लेकिन कुछ चुनौतियां भी हैं। न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट्स को पूरा करने में लंबा समय लगता है और लागत बढ़ने (Cost Overruns) का जोखिम हमेशा रहता है। इसके अलावा, यूरेनियम आयात पर निर्भरता और रेग्युलेटरी पेचीदगियां निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी रह सकती हैं।
फिलहाल, इस मीटिंग का मकसद पॉलिसी में निरंतरता दिखाना है, न कि कोई नया कॉन्ट्रैक्ट। निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि सरकार प्रोजेक्ट अवार्ड्स और प्राइवेट भागीदारी के लिए क्या नियम बनाती है।
