भारत और अमेरिका के बीच वॉशिंगटन में अहम बैठक हुई है। इस सहयोग का मुख्य मकसद स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMR) को बढ़ावा देना और **2025 SHANTI Act** के तहत प्राइवेट सेक्टर को न्यूक्लियर सेक्टर में उतारना है, ताकि **2047** तक **100 GW** न्यूक्लियर क्षमता का लक्ष्य हासिल किया जा सके।
न्यूक्लियर पावर में नया अध्याय
वॉशिंगटन में भारतीय परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष अजीत कुमार मोहंती और अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट के बीच हुई हालिया मुलाकात काफी अहम रही। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य सिविल न्यूक्लियर एनर्जी में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करना है। भारत ने 2047 तक 100 GW न्यूक्लियर क्षमता का जो विशाल लक्ष्य रखा है, उसके लिए प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी को अनिवार्य माना जा रहा है।
नई तकनीक: SMR का महत्व
यह बातचीत अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की ATLAS पहल के साथ शुरू हुई है। यह प्रोजेक्ट 'स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स' (SMR) पर केंद्रित है। ये पारंपरिक बड़े पावर प्लांट्स के मुकाबले छोटे और अधिक लचीले होते हैं, जिससे प्रोजेक्ट की लागत और जटिलता कम होने की उम्मीद है।
निवेशकों के लिए संकेत
2025 SHANTI Act ने भारत के न्यूक्लियर सेक्टर के दरवाजे प्राइवेट कंपनियों के लिए खोल दिए हैं, जो पहले सिर्फ सरकारी संस्थाओं तक सीमित थे। इस खबर के बाद न्यूक्लियर इक्विपमेंट बनाने वाली कंपनी MTAR Technologies के शेयरों में 2.15% का उछाल दर्ज किया गया।
रिस्क और चुनौतियां
हालांकि यह सेक्टर लंबी अवधि के लिए काफी आकर्षक दिख रहा है, लेकिन निवेशकों को इसके साथ जुड़ी चुनौतियों को भी समझना होगा।
- कैपिटल एक्सपेंडिचर: न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स में भारी निवेश की जरूरत होती है और इनका कंस्ट्रक्शन टाइमलाइन काफी लंबा होता है।
- एग्जीक्यूशन रिस्क: लागत बढ़ने की संभावना और कड़े इंटरनेशनल सेफ्टी रेगुलेशंस का पालन करना एक बड़ी चुनौती है।
निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि सरकार कितनी तेजी से प्राइवेट कंपनियों के लिए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को अंतिम रूप देती है और न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCIL) से नए ऑर्डर्स कब तक मिलते हैं।
