भू-राजनीतिक तूफ़ान में एनर्जी सिक्योरिटी का कवच
पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ती अशांति और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर मंडरा रहे ख़तरे के बीच, भारत ने अपने ऊर्जा आयात को सुरक्षित करने के लिए एक बड़ी चाल चली है। UAE के साथ हुए ये नए समझौते, भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का एक मज़बूत हिस्सा हैं। भारत अपनी ज़रूरतों का लगभग 85% कच्चा तेल और करीब 60% एलपीजी आयात करता है, जिसमें से एक बड़ी मात्रा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुज़रती है। हाल के महीनों में, इस मार्ग पर तनाव बढ़ने से जहाज़ों के लिए आवाजाही महंगी और जोखिम भरी हो गई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर भी असर पड़ा है।
एलपीजी सप्लाई में बड़ी मज़बूती
इन समझौतों का एक मुख्य बिंदु इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) के बीच एलपीजी की लंबी अवधि की सप्लाई को लेकर हुआ समझौता है। UAE पहले से ही भारत का सबसे बड़ा कुकिंग गैस सप्लायर है, जो भारत के कुल एलपीजी आयात का लगभग 40% हिस्सा पूरा करता है। इस बढ़ी हुई डील से भारतीय रिफाइनरियों को लंबी अवधि में खरीद की लागत का बेहतर अंदाज़ा मिलेगा और यदि पश्चिम एशिया में शिपिंग बाधित होती है तो कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा, भारत के पास UAE के साथ 4.5 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) तक के एलएनजी (Liquefied Natural Gas) कॉन्ट्रैक्ट भी हैं, जो भारत की करीब 50.1% प्राकृतिक गैस की आयात ज़रूरत को पूरा करते हैं।
स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व (SPR) को बड़ा बूस्ट
ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करने के इसी क्रम में, इंडियन स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व्स लिमिटेड (ISPRL) और ADNOC, भूमिगत कच्चे तेल भंडारण (underground crude storage) के बुनियादी ढांचे में सहयोग बढ़ा रहे हैं। यह पहल 2018 की पार्टनरशिप पर आधारित है, जिसमें ADNOC ने ISPRL की मंगलुरु सुविधा का उपयोग करके 5 मिलियन बैरल से अधिक कच्चे तेल का भंडारण किया था। यह नया ढांचा भारत की आपातकालीन कच्चा तेल भंडारण क्षमता को और मज़बूत करेगा, जिससे भू-राजनीतिक झटकों और शिपिंग बाधाओं के खिलाफ देश की ऊर्जा लचीलता बढ़ेगी। ADNOC अपनी उत्पादन क्षमता को तेज़ी से बढ़ा रहा है और 2027 तक 5 मिलियन बैरल प्रति दिन (bpd) उत्पादन का लक्ष्य रखता है, जो द्विपक्षीय ऊर्जा साझीदारी में अधिक लचीलापन ला सकता है। UAE का हाल ही में 1 मई, 2026 को OPEC से अलग होना भी उसे वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित करने में अधिक स्वायत्तता देता है।
चुनौतियां बरकरार
इन रणनीतिक कदमों के बावजूद, भारत की ऊर्जा भेद्यता बनी हुई है। देश कच्चे तेल के आयात पर लगभग 89% निर्भर है, जबकि घरेलू उत्पादन में गिरावट आ रही है। इसके अलावा, भारत की एलपीजी भंडारण क्षमता भी काफी कम है, जिसमें केवल लगभग 22 दिनों की मांग के बराबर स्टॉक है, जो कच्चे तेल (लगभग 74 दिन) या एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF, ~60 दिन) की तुलना में बहुत कम है। यह सीमित बफर स्टॉक, आपूर्ति में अचानक व्यवधान के दौरान देश को तेज़ी से प्रभावित कर सकता है।
IOCL जैसी कंपनियों के लिए, जो इन समझौतों में एक प्रमुख खिलाड़ी हैं, परिचालन का माहौल चुनौतीपूर्ण है। कंपनी के शेयर में इस साल अब तक 11% की गिरावट आई है। विश्लेषकों का कहना है कि बढ़ी हुई वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और सीमित घरेलू खुदरा दरों के कारण IOCL जैसी कंपनियां पेट्रोल पर करीब ₹20 प्रति लीटर और डीज़ल पर करीब ₹100 प्रति लीटर का नुकसान झेल रही हैं। एम्के ग्लोबल (Emkay Global) द्वारा कच्चे तेल में तेज़ी और विंडफॉल टैक्स के दबाव के कारण टारगेट प्राइस में 25% की कटौती का हवाला देते हुए 'Add' रेटिंग दी गई है, जो सेक्टर के वित्तीय दबाव को दर्शाती है।