Thermal Power Plants: कोयले की किल्लत से बढ़ा बिजली का संकट, पावर प्लांट्स का स्टॉक घटकर **27.1 मिलियन टन** पर

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AuthorNeha Patil|Published at:
Thermal Power Plants: कोयले की किल्लत से बढ़ा बिजली का संकट, पावर प्लांट्स का स्टॉक घटकर **27.1 मिलियन टन** पर

मानसून की बाधाओं और बिजली की बढ़ती मांग के बीच देश के थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले का स्टॉक गिरकर **27.1 मिलियन टन** पहुंच गया है। सप्लाई में इस कमी के कारण इंडियन एनर्जी एक्सचेंज (IEX) पर बिजली की ट्रेडिंग कीमतों में **20%** से ज्यादा का उछाल देखा गया है, जो डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ा सकता है।

देश के थर्मल पावर प्लांट्स इस समय कोयले की भारी कमी से जूझ रहे हैं। सितंबर की शुरुआत तक कोयले का स्टॉक गिरकर 27.14 मिलियन टन के स्तर पर आ गया है, जो जुलाई के अंत में 38 मिलियन टन था। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि करीब 57 पावर प्लांट्स अब 'क्रिटिकली लो' स्टॉक लेवल पर काम कर रहे हैं, यानी इनके पास जरूरत का 25% से भी कम कोयला बचा है।

मानसून और लॉजिस्टिक्स की मार

कोयले की इस कमी के पीछे मुख्य वजह ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में हो रही भारी बारिश है। बारिश के कारण माइनिंग एक्टिविटी और ट्रांसपोर्टेशन पर गहरा असर पड़ा है। कोयला खदानों पर उपलब्ध तो है, लेकिन उसे पावर प्लांट्स तक पहुँचाना एक बड़ी लॉजिस्टिक चुनौती बन गया है। हालांकि, मिनिस्ट्री ऑफ कोल का कहना है कि यह कोयले की कुल कमी नहीं, बल्कि सप्लाई चेन का मुद्दा है जिसे रेलवे और पावर अथॉरिटीज के साथ मिलकर सुलझाने की कोशिश की जा रही है।

बिजली बाजार में भारी हलचल

सप्लाई चेन में आ रही इन बाधाओं का असर बिजली की कीमतों पर साफ दिख रहा है। अगस्त 2026 में इंडियन एनर्जी एक्सचेंज पर रिकॉर्ड 13.938 बिलियन यूनिट्स की ट्रेडिंग हुई। खरीदारों की बढ़ती रुचि के कारण डे-अहेड मार्केट में बिजली की औसत कीमतों में पिछले साल के मुकाबले 22% की बढ़ोतरी हुई है, वहीं रियल-टाइम मार्केट में कीमतों में 30% से ज्यादा का उछाल आया है, जहां दाम ₹4.41 प्रति यूनिट तक पहुंच गए हैं।

निवेशकों के लिए चेतावनी

निवेशकों के लिए यह स्थिति मार्जिन और कॉस्ट रिस्क पैदा कर रही है। जिन डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों को महंगे दाम पर बिजली खरीदनी पड़ रही है, अगर वे इस बोझ को ग्राहकों पर नहीं डाल पाती हैं, तो उनकी फाइनेंशियल सेहत खराब हो सकती है। वहीं, Coal India जैसे बड़े खिलाड़ी उत्पादन तो कर रहे हैं, लेकिन परिवहन में आ रही अड़चनें उनके ग्रोथ पर असर डाल रही हैं। आने वाले हफ्तों में निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि मानसून के कमजोर पड़ने के बाद सप्लाई चेन कितनी तेजी से सामान्य होती है और क्या बिजली की बढ़ती मांग का दौर टिकाऊ है या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.