सर्दियों में बिजली की मांग में नरमी के बीच, भारत के थर्मल पावर प्लांट साल के अंत तक कोयले का स्टॉक **10 मिलियन टन** तक बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं।
गर्मियों और मानसून के दौरान बिजली की रिकॉर्ड मांग के बाद, अब थर्मल पावर सेक्टर राहत की सांस ले रहा है। पीक बिजली मांग जो कभी 270 GW के स्तर तक पहुंच गई थी, अब घटकर 217 GW के आसपास आ गई है। इस नरमी का फायदा उठाते हुए पावर जनरेटर्स अब अपने कोयला भंडार को मजबूत करने में जुट गए हैं। आधिकारिक अनुमानों के अनुसार, दिसंबर अंत तक कोयले के स्टॉक में 10 मिलियन टन का इजाफा करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि फिलहाल यह 18.1 मिलियन टन पर है।
लॉजिस्टिक्स में सुधार का असर
कोयले की सप्लाई चेन में स्थिरता के लिए लॉजिस्टिक्स अहम भूमिका निभा रहे हैं। अक्टूबर में रोजाना औसतन 472 कोयला रेक की आवाजाही हुई है, जिससे सप्लाई लाइन में सुधार आया है। पूर्वी भारत में मौसम संबंधी चुनौतियों के बावजूद रेलवे की यह तत्परता पावर प्लांट्स के लिए संजीवनी का काम कर रही है।
निवेशकों के लिए क्यों है जरूरी?
निवेशकों के लिए यह स्टॉक बिल्ड-अप एक बड़ा 'मॉनिटरेबल' है। जब कोयले का स्टॉक कम होता है, तो कंपनियों को मजबूरी में स्पॉट मार्केट से महंगी बिजली खरीदनी पड़ती है, जो उनके प्रॉफिट मार्जिन पर चोट करती है। फिलहाल 79 यूनिट्स में कोयले का स्टॉक क्रिटिकल स्तर पर है, जो अक्टूबर की शुरुआत में 89 था। यह सुधार संकेत दे रहा है कि ऑपरेशनल स्थिति बेहतर हो रही है।
सरकार का लक्ष्य फाइनेंशियल ईयर के अंत तक 55 मिलियन टन का क्लोजिंग स्टॉक बनाए रखने का है। भविष्य में बिजली कंपनियों के तिमाही नतीजों पर नजर रखें, क्योंकि कोयले का यह बफर भविष्य की महंगी बिजली खरीद के जोखिम को कम करने में बड़ी भूमिका निभाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में Coal India की सप्लाई और Indian Railways की लॉजिस्टिक्स क्षमता पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।
