ग्रिड को आधुनिक बनाने पर ज़ोर
भारत की ऊर्जा नीति अब एक विकेन्द्रीकृत मॉडल (distributed model) की ओर बढ़ रही है। इसका मकसद नई संभावनाओं को तलाशना और एक जगह केंद्रित रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता से जुड़े जोखिमों को कम करना है। फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए प्रोत्साहन देना एक बड़ी रणनीति है, जिससे भौगोलिक विविधीकरण (geographic diversification) बढ़े और लॉजिस्टिक्स व ग्रिड स्थिरता (grid stability) से जुड़ी बाधाएं दूर हों।
रिन्यूएबल एनर्जी का बढ़ेगा दायरा
सरकार फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए इंसेंटिव (incentives) देने पर विचार कर रही है ताकि रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता को ज्यादा से ज्यादा क्षेत्रों में फैलाया जा सके। इससे राजस्थान और गुजरात जैसे प्रमुख राज्यों पर निर्भरता कम होगी, जो फिलहाल देश के बड़े हिस्से की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करते हैं।
नीति आयोग (NITI Aayog) के लक्ष्यों के अनुसार, भारत को 2050 तक करीब 1,800 GW रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता और बड़े बैटरी स्टोरेज सिस्टम (battery storage systems) की जरूरत होगी। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में फ्लोटिंग सोलर का बाजार तेजी से बढ़ रहा है, क्योंकि देश जमीन के बजाय पानी के स्रोतों का उपयोग करके रिन्यूएबल क्षमता बढ़ा रहे हैं।
घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा
सरकार सौर ऊर्जा के मुख्य कंपोनेंट्स (components) की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को भी बढ़ावा देना चाहती है। भारत का लक्ष्य इंगट वेफर्स (ingot wafers) और पॉलिसिलिकॉन (polysilicon) जैसे जरूरी पार्ट्स का उत्पादन बढ़ाना है, जिसके लिए वह अभी काफी हद तक आयात पर निर्भर है।
हालांकि भारत में सोलर मॉड्यूल और सेल बनाने की अच्छी क्षमता है, लेकिन पॉलिसिलिकॉन जैसे कच्चे माल का आयात करना पड़ता है। प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीमों ने कुछ हद तक उत्पादन बढ़ाने में मदद की है, लेकिन ऊंची निवेश लागत और आयात पर निर्भरता लागत-प्रतिस्पर्धा (cost competitiveness) में बाधा डाल रही है। न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी मंत्रालय (Ministry of New and Renewable Energy) एक विशेष पीएलआई स्कीम पर विचार कर रहा है ताकि एक पूरी तरह से घरेलू सोलर सप्लाई चेन तैयार हो सके।
ग्रिड में निवेश और कम लागत
रिन्यूएबल एनर्जी की रुकावट (curtailment) को कम करना प्रोजेक्ट की सफलता और ग्रिड की दक्षता (efficiency) के लिए महत्वपूर्ण है। भारत 2030 तक $574 बिलियन के निवेश से एक 'सुपर ग्रिड' (super grid) बनाने की योजना बना रहा है, जिसमें हाई-वोल्टेज लाइनें होंगी जो रिन्यूएबल एनर्जी वाले इलाकों से बिजली को कुशलता से ट्रांसपोर्ट करेंगी।
इस योजना में ट्रांसमिशन लाइनों और सबस्टेशन क्षमता का विस्तार भी शामिल है ताकि बड़े पैमाने पर गैर-जीवाश्म ईंधन (non-fossil fuel) आधारित ऊर्जा को सपोर्ट मिल सके। 2050 तक ग्रिड स्थिरता (grid stability) सुनिश्चित करने के लिए 2,000 GWh बैटरी स्टोरेज की भी आवश्यकता होगी। बिजली की कीमतों को कम करना भारत के वैश्विक औद्योगिक प्रतिस्पर्धा (global industrial competitiveness) के लिए बहुत जरूरी है, क्योंकि अभी औद्योगिक बिजली दरें कई अन्य देशों की तुलना में अधिक हैं। बेहतर ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी स्टोरेज इन लागतों को कम करने की कुंजी हैं।
आगे की चुनौतियां
महत्वाकांक्षी लक्ष्यों के बावजूद, कई चुनौतियां बनी हुई हैं। ग्रिड अपग्रेड (grid upgrades) की गति रिन्यूएबल एनर्जी विस्तार की रफ्तार से मेल नहीं खा सकती, जिससे ऊर्जा की रुकावट जारी रह सकती है।
सोलर मैन्युफैक्चरिंग के लिए पॉलिसिलिकॉन पर भारत की आयात निर्भरता एक कमजोरी है, जिसे पीएलआई स्कीम के कार्यान्वयन (implementation) और कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से और बढ़ावा मिलता है। औद्योगिक बिजली की ऊंची दरें और बिजली वितरण कंपनियों (electricity distribution companies - DISCOMs) के वित्तीय संघर्ष भी लागत-प्रतिस्पर्धा में बाधा डाल रहे हैं।
रिन्यूएबल एनर्जी के विकेंद्रीकरण पर ध्यान केंद्रित होने के बावजूद, क्षमता का एक जगह केंद्रित होना ट्रांसमिशन लाइनों में बड़े, समय पर निवेश की मांग करता है ताकि बाधाओं से बचा जा सके। पावर परचेज एग्रीमेंट (PPAs) पर हस्ताक्षर करने में देरी से सेक्टर को बढ़ाने में एक्जीक्यूशन रिस्क (execution risks) बढ़ जाते हैं।
सकारात्मक Outlook, लेकिन राह में मुश्किलें
भारत के रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर काOutlook सकारात्मक बना हुआ है, जिसे मजबूत सरकारी नीतियों और अधिक प्रतिस्पर्धी बिजली टेरिफ (tariffs) का समर्थन प्राप्त है। फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY2026) तक 32 GW से अधिक नई क्षमता जुड़ने की उम्मीद है।
निवेशकों का विश्वास भी मजबूत है, जो रिन्यूएबल एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े कमिटमेंट्स (commitments) में दिखता है। हालांकि, निरंतर विकास के लिए व्यावहारिक चुनौतियों से पार पाना, नीतिगत स्थिरता बनाए रखना और ग्रिड आधुनिकीकरण (grid modernization) में तेजी लाना महत्वपूर्ण होगा। फ्लोटिंग सोलर का सफल एकीकरण, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना और ग्रिड की फ्लेक्सिबिलिटी (flexibility) को बढ़ाना, भारत के ऊर्जा लक्ष्यों और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को हासिल करने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
