Wind Energy: भारत का बड़ा लक्ष्य! FY27 में **8 GW** विंड पावर जोड़ने की तैयारी, शेयरहोल्डर्स के लिए क्या हैं संकेत?

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AuthorMehul Desai|Published at:
Wind Energy: भारत का बड़ा लक्ष्य! FY27 में **8 GW** विंड पावर जोड़ने की तैयारी, शेयरहोल्डर्स के लिए क्या हैं संकेत?

भारत सरकार ने रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर के लिए बड़ा लक्ष्य तय किया है। फाइनेंशियल ईयर 2027 तक **8 GW** नई विंड एनर्जी क्षमता जोड़ने की योजना है, जो साल 2030 तक **100 GW** के मिशन को रफ्तार देगी।

मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बनाम मांग

निवेशकों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि देश में विंड एनर्जी इक्विपमेंट बनाने की क्षमता 24 GW सालाना है, जो कि 8 GW की प्रस्तावित इंस्टॉलेशन मांग से कहीं ज्यादा है। इस सरप्लस क्षमता ने भारत को विंड कंपोनेंट्स का एक बड़ा एक्सपोर्ट हब बना दिया है, जिससे पिछले साल ₹12,000 करोड़ का एक्सपोर्ट हासिल हुआ। हालांकि, घरेलू बाजार में मांग और सप्लाई का यह अंतर कंपनियों के बीच प्राइसिंग वॉर यानी कड़ी प्रतिस्पर्धा भी पैदा कर सकता है।

निवेश का गणित

नए विंड प्रोजेक्ट्स लगाने के लिए प्रति मेगावाट लगभग ₹7 करोड़ का खर्च आता है। इस हिसाब से 7 से 8 GW की वार्षिक इंस्टॉलेशन रफ्तार के लिए करीब ₹50,000 करोड़ के बड़े कैपिटल एक्सपेंडिचर की जरूरत होगी। निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनियां अपनी बैलेंस शीट और फाइनेंसिंग को कैसे मैनेज करती हैं।

ऑफशोर विंड पर फोकस

सरकार अब तमिलनाडु के तटों पर ऑफशोर विंड प्रोजेक्ट्स को तेजी से बढ़ावा दे रही है। यहां हवा की रफ्तार 10 मीटर प्रति सेकंड से ज्यादा है, जिससे 55% तक कैपेसिटी यूटिलाइजेशन मिल सकता है। ऑफशोर प्रोजेक्ट्स में शुरुआती कैपिटल खर्च ज्यादा होता है, इसलिए टेक्नोलॉजी एडॉप्शन और कॉस्ट मैनेजमेंट इस सेक्टर के शेयरों के लिए बड़े 'मॉनिटरेबल' पॉइंट्स होंगे।

आने वाले समय में ग्रिड कनेक्टिविटी, प्रोजेक्ट पूरा होने की टाइमलाइन और मार्जिन को बनाए रखने की क्षमता इस सेक्टर की चाल तय करेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.