Central Electricity Authority ने देश के एनर्जी मिक्स में बिजली की हिस्सेदारी को मौजूदा **22%** से बढ़ाकर **45-50%** तक पहुँचाने का रोडमैप तैयार किया है। इस बड़े बदलाव के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और रिन्यूएबल कैपेसिटी में भारी निवेश किया जाएगा।
भारत अपने एनर्जी आर्किटेक्चर में एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। Central Electricity Authority (CEA) का लक्ष्य है कि साल 2047 तक देश के कुल एनर्जी मिक्स में बिजली का योगदान दोगुना से भी अधिक हो जाए। यह कदम तेजी से बढ़ते औद्योगिक उत्पादन, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए उठाया गया है।
बड़े निवेश और लक्ष्य
इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार ग्रिड आधुनिकीकरण पर जोर दे रही है। इसके तहत ₹4 लाख करोड़ की लागत वाली ट्रांसमिशन परियोजनाओं की पाइपलाइन तैयार है, जो 266 GW बिजली के वितरण के लिए जरूरी हैं। जनरेशन टारगेट भी काफी आक्रामक हैं:
- 2035-36 तक 100 GW पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज क्षमता।
- 2047 तक 100 GW न्यूक्लियर पावर क्षमता।
पिछले साल सेक्टर ने 64,000 MW की नई क्षमता जोड़ी, जिसमें से 50,000 MW से ज्यादा हिस्सा रिन्यूएबल एनर्जी का था। इस साल का लक्ष्य 70,000 MW नई क्षमता जोड़ने का है।
चुनौतियां और जोखिम
यह विकास का रास्ता इतना आसान भी नहीं है। निवेशकों को कुछ अहम बातों पर नजर रखनी होगी:
- DISCOMs की माली हालत: सरकारी वितरण कंपनियों (DISCOMs) का खराब वित्तीय स्वास्थ्य पेमेंट साइकिल और निवेश के भरोसे को प्रभावित कर रहा है।
- ग्रिड मैनेजमेंट: रिन्यूएबल एनर्जी की अस्थिर आपूर्ति को संभालने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक ग्रिड मैनेजमेंट की सख्त जरूरत है।
- सप्लाई चेन: ग्रिड से जुड़े हार्डवेयर के लिए आयात पर निर्भरता से ग्लोबल प्राइस वोलेटिलिटी का जोखिम बना रहता है।
- जमीन अधिग्रहण: बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए लैंड एक्विजिशन और समय पर क्लीयरेंस मिलना अब भी एक बड़ी बाधा बनी हुई है।
आने वाले समय में निवेशकों के लिए सरकारी टेंडर्स, प्रोजेक्ट कमीशनिंग की टाइमलाइन और यूटिलिटी कंपनियों का प्रदर्शन यह तय करेगा कि यह बदलाव कितनी तेजी से जमीन पर उतरता है।
