भारत सरकार फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने के लिए बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर की तैयारी में है। 2027 तक **5,000** समर्पित इथेनॉल स्टेशन खोलने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी।
एनर्जी सेक्टर में बड़ा बदलाव
भारत सरकार ने अपनी एनर्जी पॉलिसी में बड़ा बदलाव करते हुए 2027 के अंत तक 5,000 डेडिकेटेड इथेनॉल फ्यूल स्टेशन स्थापित करने की योजना बनाई है। यह कदम मौजूदा E20 ब्लेंडिंग टारगेट से कहीं आगे है और इसका उद्देश्य वाहनों को E85 और E100 जैसे उच्च इथेनॉल मिश्रण पर चलाने के लिए प्रोत्साहित करना है। इसका मुख्य मकसद वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वेस्ट एशिया से होने वाली सप्लाई चेन की दिक्कतों से देश को सुरक्षित करना है।
ऑटो कंपनियों की चुनौती
Maruti Suzuki और Hero MotoCorp जैसी दिग्गज कंपनियां पहले ही फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल पर काम कर रही हैं। लेकिन, असली चुनौती उपभोक्ता स्तर पर है। हाई-इथेनॉल मिश्रण इंजन के लिए विशेष इंजीनियरिंग बदलाव की मांग करता है, जिससे मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट बढ़ सकती है। निवेशकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कंपनियां इस बढ़ी हुई लागत को कैसे मैनेज करती हैं और क्या भारतीय ग्राहक इन मॉडल्स को अपनाते हैं।
इकोनॉमिक और स्ट्रक्चरल रिस्क
इस योजना के साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हैं। फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की फ्यूल एफिशिएंसी पेट्रोल के मुकाबले कम हो सकती है, जो ग्राहकों के निर्णय को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा, इथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ना और अनाज पर निर्भरता खाद्य सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बन सकती है। पानी की भारी खपत और कच्चा माल (Feedstock) की उपलब्धता आने वाले समय में नीति निर्माताओं के लिए एक बड़ा मुद्दा हो सकती है।
