Bio-Gas Sector: सरकार का बड़ा दांव! ₹23,731 करोड़ की स्कीम से बदलेगी बायो-गैस की तस्वीर

ENERGY
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
Bio-Gas Sector: सरकार का बड़ा दांव! ₹23,731 करोड़ की स्कीम से बदलेगी बायो-गैस की तस्वीर

सरकार ने GOBARdhan स्कीम के तहत **₹23,731 करोड़** का बड़ा ऐलान किया है। इसका मकसद देश में कंप्रेस्ड बायो-गैस (CBG) के उत्पादन को **10 गुना** तक बढ़ाना और विदेशी गैस पर निर्भरता कम करना है।

ब्लेंडिंग नियम और प्राइस सपोर्ट

प्रोड्यूसर्स को बाजार की चिंता न हो, इसके लिए सरकार ने सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों पर अनिवार्य ब्लेंडिंग नियम लागू किए हैं। इन कंपनियों को इस फाइनेंशियल ईयर में 3% CBG को नेचुरल गैस के साथ मिलाना होगा। यह लक्ष्य अगले साल 4% और साल 2028-29 तक 5% हो जाएगा। इसके अलावा, सरकार ने 10 साल के लिए ₹2,110 प्रति MMBtu का फिक्स्ड प्राइस सुनिश्चित किया है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। साथ ही, छोटे और मध्यम स्तर के प्रोजेक्ट्स के लिए हर टन प्रोडक्शन क्षमता पर ₹2 करोड़ तक की कैपिटल सहायता भी दी जाएगी।

पुरानी चुनौतियों का सामना

इन्वेस्टर्स को यह ध्यान रखना चाहिए कि पहले SATAT जैसे कार्यक्रमों को कई बाधाओं का सामना करना पड़ा था। प्रोजेक्ट्स के लिए परमिट और फंड की दिक्कतें रही हैं। बैंकों ने भी अब तक इन प्रोजेक्ट्स को 'हाई-रिस्क' माना है। इसके अलावा, खेती का कचरा, गोबर और म्युनिसिपल कचरे की सप्लाई को साल भर बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि यह लॉजिस्टिक्स पर निर्भर करता है। नई स्कीम में छोटे प्रोजेक्ट्स के लिए 85% तक कर्ज की गारंटी दी गई है, जिससे लेंडर्स का भरोसा बढ़ने की उम्मीद है।

इन्वेस्टर्स के लिए क्या है खास?

सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के लिए यह ब्लेंडिंग अनिवार्य नियम भविष्य में उनके प्रॉफिट मार्जिन को कैसे प्रभावित करेगा, यह देखने वाली बात होगी। क्या CBG का खर्च इम्पोर्टेड नेचुरल गैस से सस्ता पड़ेगा? साथ ही, प्रोजेक्ट्स के समय पर शुरू होने और कचरा कलेक्शन की व्यवस्था इन कंपनियों की परफॉर्मेंस तय करेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.