Nuclear Power: भारत का 100GW का महा-लक्ष्य, क्या फंड की कमी बनेगी बड़ी बाधा?

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AuthorMehul Desai|Published at:
Nuclear Power: भारत का 100GW का महा-लक्ष्य, क्या फंड की कमी बनेगी बड़ी बाधा?

भारत ने 2047 तक अपनी न्यूक्लियर एनर्जी क्षमता को बढ़ाकर **100 GW** तक पहुंचाने का बड़ा लक्ष्य रखा है, जिसके लिए **$210 बिलियन** की भारी-भरकम राशि की जरूरत है। हालांकि, मौजूदा समय में इसे 'ग्रीन' फाइनेंसिंग का दर्जा न मिलने से कम ब्याज पर फंड जुटाने में मुश्किल आ रही है।

भारत अपनी ऊर्जा रणनीति में एक बड़ा बदलाव कर रहा है। देश का लक्ष्य साल 2047 तक न्यूक्लियर पावर क्षमता को 100 GW तक ले जाना है। मौजूदा समय में 24 रिएक्टर्स के जरिए देश में 8.78 GW की क्षमता चालू है, जबकि 9 और यूनिट्स पर काम चल रहा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए करीब $210 बिलियन के निवेश की दरकार है।

फाइनेंसिंग की सबसे बड़ी चुनौती

न्यूक्लियर एनर्जी प्रोजेक्ट्स फिलहाल भारत के सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड फ्रेमवर्क का हिस्सा नहीं हैं। अगर किसी प्रोजेक्ट को 'ग्रीन' लेबल मिल जाता है, तो कंपनियां आम कमर्शियल लोन के मुकाबले बहुत सस्ती दरों पर पैसा जुटा सकती हैं। इस दर्जे के अभाव में प्रोजेक्ट डेवलपर्स को महंगे कर्ज का बोझ उठाना पड़ रहा है, जो मुनाफे पर सीधा असर डालता है। NITI Aayog ने इस पर नियमों की समीक्षा करने की बात कही है ताकि निवेश का रास्ता साफ हो सके।

निजी भागीदारी और रिस्क

साल 2025 के SHANTI Act ने न्यूक्लियर चेन में प्राइवेट प्लेयर्स के लिए दरवाजे खोल दिए हैं, लेकिन विदेशी टेक्नोलॉजी को लेकर अब भी कुछ अनिश्चितताएं बरकरार हैं। टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और रेगुलेटरी मंजूरी में देरी होने पर प्रोजेक्ट की लागत बढ़ सकती है। EPC फर्मों से जुड़े निवेशकों को अब सरकारी नीतिगत फैसलों पर पैनी नजर रखने की जरूरत है।

टैलेंट की कमी और आगे की राह

सिर्फ फंड ही नहीं, बल्कि स्किल्ड मैनपावर की कमी भी एक बड़ा अड़चन है। इस सेक्टर में वैज्ञानिक और तकनीकी कर्मचारियों की बड़ी मांग है, जबकि ट्रेनिंग प्रोग्राम फिलहाल सीमित हैं। अगर सरकार आने वाले समय में न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स को ग्रीन बॉन्ड के दायरे में लाती है, तो इससे कर्ज की लागत कम होगी और प्रोजेक्ट्स की वायबिलिटी (Viability) में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.