India Solar Policy: घरेलू सेल ज़रूरी, डेवलपर्स पर बोझ, स्थानीय निर्माताओं की चांदी

ENERGY
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AuthorAditya Rao|Published at:
India Solar Policy: घरेलू सेल ज़रूरी, डेवलपर्स पर बोझ, स्थानीय निर्माताओं की चांदी
Overview

भारत सरकार ने 1 जून, 2026 की ALMM List-II की डेडलाइन बढ़ाने से इनकार कर दिया है। इसका मतलब है कि अब सोलर प्रोजेक्ट्स में सिर्फ घरेलू तौर पर बने सेल्स का ही इस्तेमाल होगा। इससे डेवलपर्स को अपनी योजनाओं में बदलाव करना पड़ेगा, प्रोजेक्ट की लागत **3%** से **5%** तक बढ़ सकती है और प्रोजेक्ट टाइमलाइन पर भी असर पड़ सकता है, जबकि स्थानीय निर्माताओं को इसका सीधा फायदा मिलेगा।

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घरेलू सोलर सेल्स पर बढ़ी निर्भरता

Ministry of New and Renewable Energy (MNRE) ने Approved List of Models and Manufacturers (ALMM) List-II की डेडलाइन आगे न बढ़ाने का फैसला किया है। इसका मतलब है कि अब सरकारी मदद से चलने वाले, नेट-मीटरिंग और ओपन-एक्सेस वाले सभी सोलर प्रोजेक्ट्स में केवल भारत में बने सोलर सेल्स का ही इस्तेमाल करना होगा। सरकार उन प्रोजेक्ट्स के लिए कुछ छूट दे सकती है जिनमें ज़मीन अधिग्रहण या उपकरण लगाने जैसे बड़े निवेश पहले ही हो चुके हैं, लेकिन मुख्य नीति का उद्देश्य भारत के सोलर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत करना है।

स्थानीय निर्माताओं के लिए सप्लाई चेन की चुनौती

यह नीति Premier Energies और Waaree Energies जैसे भारतीय सोलर सेल उत्पादकों के लिए एक बड़ा बूस्ट है। हालांकि, 2026 की शुरुआत तक घरेलू क्षमता, जो लगभग 27 GW है, देश के बड़े सौर ऊर्जा लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती है। नई फैक्ट्रियों को पूरी और स्थिर उत्पादन क्षमता तक पहुंचने में समय लगता है। इस सीमित क्षमता का मतलब है कि डेवलपर्स अप्रूव्ड घरेलू कंपोनेंट्स के लिए प्रतिस्पर्धा करेंगे, जिससे निर्माताओं को अपनी कीमतें बढ़ाने का मौका मिलेगा।

डेवलपर्स के लिए बढ़ी लागत और प्रोजेक्ट जोखिम

NTPC Green Energy, JSW Energy और KPI Green Energy जैसे प्रोजेक्ट डेवलपर्स को महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कई डेवलपर्स ने आयातित सेल्स की कम लागत की उम्मीद में प्रोजेक्ट्स की योजना बनाई थी। भारतीय सेल्स पर स्विच करने से कुल प्रोजेक्ट खर्च 3% से 5% तक बढ़ सकता है, जिससे फिक्स्ड-प्राइस कॉन्ट्रैक्ट्स पर मुनाफा कम हो जाएगा। समय पर अप्रूव्ड सप्लाई न मिलने से जुर्माने का जोखिम भी बढ़ जाता है और पावर परचेज एग्रीमेंट्स (PPAs) की व्यवहार्यता पर भी असर पड़ सकता है।

लागत और दक्षता पर चिंताएं

घरेलू उत्पादन पर जोर देने से कई चिंताएं खड़ी हो गई हैं। महंगी भारतीय सेल्स का इस्तेमाल नए सौर क्षमता वृद्धि को धीमा कर सकता है। यदि घरेलू निर्माता जून की डेडलाइन तक मांग को पूरा करने के लिए उत्पादन नहीं बढ़ा पाते हैं, तो प्रोजेक्ट में देरी पूरे सेक्टर में फैल सकती है। घरेलू लिस्ट तक टेक्नोलॉजी के विकल्पों को सीमित करने से डेवलपर्स को वैश्विक स्तर पर उपलब्ध मॉड्यूल की तुलना में कम कुशल या अधिक महंगे मॉड्यूल का उपयोग करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है, जो भारत के 500 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को प्रभावित कर सकता है।

मार्केट रिएक्शन और भविष्य का अनुमान

निवेशक यह मूल्यांकन कर रहे हैं कि कौन सी कंपनियां लाभान्वित होंगी और कौन संघर्ष करेंगी। निर्माताओं के सामने मांग को पूरा करने के लिए जल्दी से उत्पादन बढ़ाने की चुनौती है। मजबूत वित्तीय स्थिति वाले डेवलपर्स जो बढ़ी हुई लागतों को वहन कर सकते हैं, और जिन्होंने अप्रूव्ड घरेलू उपकरणों के लिए विविध सप्लाई चेन सुरक्षित कर ली है, उन्हें तरजीह मिलने की संभावना है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.